HOME MESSAGE OBJECTIVE TRAINING & PROGRAMME SELECTION PROCESS SPECIAL INFORMATION FEE STRUCTURE IMPORTANT DATES (2010) FORM DOWNLOAD
Helpline : 9971663344, 9910664499, 9871194477 Back to Punjab Kesari News
Font Size
जे. आर. मीडिया इंस्टीट्यूट

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना गया है, इसीलिए भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में पत्रकारिता का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। देश के स्वतंत्र होने से पूर्व और पश्चात प्रैस अपनी भूमिका को बड़े ही प्रभावशाली ढंग से स्थापित कर चुकी है। वर्तमान में अनेक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दों को ठोस रूप से उठाकर न केवल जनमत तैयार किया है बल्कि न्यायपालिका तक को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने को बाध्य कर दिया। पत्रकारिता अपने वैज्ञानिक और कलात्मक पहलुओं के कारण छात्रों के लिए आकर्षण का केन्द्र बनती जा रही है।
देश में पत्रकारिता के इतिहास की चर्चा करते समय पंजाब केसरी पत्र समूह किसी परिचय का मोहताज नहीं। शहीद ला. जगत नारायण द्वारा वर्ष 1948 में 'हिन्द समाचार' के रूप में लगाया गया यह पौधा आज अनेक शाखाओं के साथ एक वट वृक्ष बन चुका है। इस पत्र समूह ने जहां देश में लागू आपातकालीन स्थिति में 10 दिनों तक अपने समाचारपत्रों को जालंधर में ट्रैक्टर की मदद से प्रकाशित कर सरकारी तानाशाही का मुंहतोड़ जवाब दिया वहीं जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा इस पत्र समूह पर लगाए गए प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट का द्वार खटखटा कर मुक्त कराया।
ला. जगत नारायण जी को सहयोग देने के लिए वर्ष 1952 में उनके ज्येष्ठ पुत्र रमेश चंद्र जी ने भी लेखनी संभाली। देश की अखंडता के लिए जो योगदान पंजाब केसरी परिवार का रहा वह शायद ही किसी अन्य समाचार-पत्र का रहा हो। राष्ट्रहित में चली बेबाक कलम के कारण पंजाब में फन फैला रही विघटनकारी ताकतों को नेस्तनाबूद होना पड़ा। नि:सन्देह इस संघर्ष में इस परिवार को स्व. ला. जगत नारायण, स्व. रमेश चन्द्र सहित 62 बहुमूल्य जानें गंवानी पड़ीं। शहादत का इतना बड़ा इतिहास दुनिया की पत्रकारिता में अन्य कहीं दिखाई नहीं देता।
पंजाब केसरी पत्र समूह सामाजिक सरोकारों में भी अपना योगदान देने में कभी पीछे नहीं रहा। वर्ष 1981 से 93 तक जब आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के हाथों पंजाब छलनी हो गया तो स्व. रमेश चन्द्र जी ने अनाथ हुए परिवारों, विधवाओं और घायलों की सहायता के लिए 27 नवम्बर 1983 को हिन्द समाचार पत्र समूह की ओर से शहीद परिवार फंड की स्थापना की। इस फंड में करोड़ों की राशि एकत्र हुई जिससे हजारों परिवारों की आर्थिक सहायता की गई। गुजरात-उड़ीसा में आया भूकम्प हो या राजस्थान में पड़ा अकाल, इस पत्र समूह ने न केवल स्वयं योगदान दिया बल्कि एक अपील पर पाठकों से एकत्र हुई सहयोग राशि और सामग्री पीडि़तों तक पहुंचाई।
वर्तमान में भी जर्जर हो रहे सामाजिक ढांचे में बुजुर्गों की उपेक्षा के मद्देनजर उन्हें सौहार्दपूर्ण वातावरण, चिकित्सा सुविधा और मनोरंजन उपलब्ध कराने के लिए संपादक अश्विनी कुमार की धर्मपत्नी किरण चोपड़ा ने वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की स्थापना कर न केवल विलक्षण सूझ-बूझ का परिचय दिया बल्कि ममतापूर्ण सोच के साथ बुढ़ापे में जीने की एक ललक पैदा कर हजारों वृद्धों को इस संस्था रूपी परिवार का सक्रिय सदस्य बना डाला।
आज के बिगड़ते सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवेश में जहां इस समूह के संपादक अश्विनी कुमार के विशेष संपादकीय और संपादकीय किसी भी भ्रष्टाचारी पर प्रहार करने से नहीं चूकते वहीं उन्होंने पत्रकारिता में गिरते मूल्यों को भी गंभीरता से महसूस किया। इसी के दृष्टिïगत उन्होंने पत्रकारिता के एक ऐसे संस्थान की स्थापना की जो स्व. ला. जगत नारायण और स्व. रमेश चन्द्र द्वारा दर्शाए गए निष्पक्ष एवं बेबाक पत्रकारिता के मार्ग पर चलने वाले कलम के सिपाही तैयार कर सके। इस कार्य के लिए विशेष रूप से एक संस्था श्री जे. आर. एज्यूकेशन सोसाइटी की स्थापना की गई जिसमें पत्रकारिता और शिक्षा जगत से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया गया ताकि देश को संस्कारवान पत्रकार मिल सकें। इस सोसाइटी ने इस आशय से वर्ष 2010 में जे.आर. मीडिया इंस्टीट्यूट नामक इकाई का शुभारम्भ किया। दो सफल सत्रों के बाद अब तीसरा सत्र प्रारम्भ हो रहा है।
 
 
पावती-पत्र
प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात सभी पात्र छात्र-छात्राओं को इंस्टीट्यूट की ओर से पावती-पत्र जारी किए जाएंगे। गुम हो जाने या खराब होने पर दूसरा पावती-पत्र 100 (एक सौ) लेकर जारी किया जाएगा। इस पत्र का व्यक्तिगत सम्पर्क केन्द्र और परीक्षा केन्द्र पर छात्र के पास होना अनिवार्य है।

अनुशासन
छात्रों/छात्राओं को इंस्टीट्यूट के नियम-कानूनों का पालन करना होगा। किसी भी छात्र-छात्रा का आचरण, सहपाठियों और स्टाफ से व्यवहार संतोषजनक नहीं होने व एक चेतावनी (यदि सम्पर्क केन्द्र में व्यक्तिगत सम्पर्क कार्यक्रम के दौरान उचित समझी गई) के बाद भी पूर्ववत रहने पर पाठ्यक्रम से निकाला जा सकता है। व्यक्तिगत सम्पर्क केन्द्र में धूम्रपान, मादक पदार्थों का प्रयोग, उपकरणों का दुरुपयोग वर्जित है।

पुस्तकालय सुविधा
संस्थान स्थित पुस्तकालय सोमवार से शुक्रवार तक प्रात: 10.30 बजे से अपराह्न 2.30 बजे तक खुला रहेगा। छुट्टी के दिनों में यह बंद रहता है। प्रत्येक छात्र-छात्रा एक बार में एक पखवाड़े के लिए दो पुस्तकें ले सकेगा। समय पर पुस्तक वापस नहीं लौटाने पर पांच रुपया प्रतिदिन के हिसाब से दंड देना होगा। पुस्तकालय की पुस्तक खो देने पर पुस्तक जारी कराने वाले छात्र-छात्रा को या तो नई पुस्तक देनी होगी अथवा उसकी मूल्य राशि संस्थान में जमा करानी होगी।

काम का समय
इंस्टीट्यूट सोमवार से शुक्रवार तक प्रात: 9.30 बजे से अपराह्न 2.30 बजे तक खुला रहता है तथा भारत सरकार द्वारा दिल्ली के लिए घोषित सभी अवकाश दिवस पर बंद रहेगा।

Visitor No.
 
© 2011-12, Punjab Kesari All rights reserved.