भारत पुराने फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिये कर रहा ठोस प्रयास: फिच


नयी दिल्ली: फिच रेटिंग ने आज कहा कि भारतीय प्रशासन बैंकिंग क्षेत्र में पुराने फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिये ठोस प्रयास कर रहा है लेकिन उसकी इस पहल से निकट भविष्य में बैंक के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

एजेंसी ने कहा है कि अगले कुछ सालों के दौरान बैंकिंग क्षेत्र में फंसे कर्ज की समस्या केंद्र में बनी रहेगी और उनमें नुकसान बढऩे की स्थिति में पहले से कमजोर कुछ बैंकों को यदि अनुमानित पूंजी नहीं मिलती है तो वह न्यूनतम पूंजी जरूरत की सीमा में भी नहीं रह पायेंगे। भारत में हाल में जो भी नियामकीय कदम उठाये गये उनसे यही आभास मिलता है कि प्रशासन बैंकों में फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिये अधिक मजबूत प्रयास कर रहा है।

फिच ने कहा, ”निकट भविष्य में इसके लिये बैंकों को अधिक प्रावधान करना होगा और इसका मतलब होगा कि बैंकों के मुनाफे पर लगातार दबाव बढेगा।” कुल मिलाकर सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में स्थिति को साफ सुथरा बनाने का जो काम शुरू किया है, उससे क्षेत्र में मजबूती आयेगी।
बैंकों का करीब 9 लाख करोड़ रूपये से लेकर 12 लाख करोड़ रूपये तक की राशि कर्ज में फंसी पड़ी है। इसमें पुराना कर्ज, पुनर्गठित रिण और कंपनियों को मिलने वाला अग्रिम शामिल है जिनकी समय पर वसूली नहीं हो पा रही है।

(भाषा)

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