आधे वोट से जीते अहमद पटेल , कांग्रेस के कहे जाते हैं चाणक्य


गुजरात की 3 राज्‍यसभा सीटों के लिए मंगलवार को हुए मतदान के बाद साढ़े नौ घंटे चला हाई वोल्टेज ड्रामा कांग्रेस नेता अहमद पटेल की जीत पर खत्म हुआ।

आपको बता दे कि पटेल को कुल 44 वोट मिले। वहीं भारतीय जनता पार्टी की ओर से अमित शाह और स्मृति ईरानी ने भी राज्यसभा में अपनी सीट पक्की की। राज्यसभा के लिए गुजरात की तीन सीटों पर हुए मतदान में अहमद पटेल के 44 वोटों के अलावा स्मृति ईरानी को 46, अमित शाह को 46 और बलवंत सिंह राजपूत को 38 वोट मिले।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को हराने के लिए अमित शाह एंड कंपनी की तरफ से बेहद आक्रामक तैयारी दिखी। एक वक्त तो लगा कि अमित शाह ने मानो पटेल को हराने की ठान रखी है। वहीं कांग्रेस ने भी उन पर अपने विधायकों को डिगाने के लिए हर तरह के साम, दाम, दंड, भेद अपनाने के आरोप लगाए। ऐसे में चुनावी नतीजों के बाद एक बात तो साफ इन लड़ाई में कांग्रेस ही विजेता बनकर उभरी।

बता दे कि जिस तरह से अमित शाह को भारतीय जनता पार्टी का चाणक्य कहा जाता है वैसे ही अहमद पटेल को कांग्रेस के चाणक्य कहे जाते हैं । अहमद पटेल ने वर्ष 1976 से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले अहमद पटेल 3 बार लोकसभा और 5 बार राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं। वर्ष 2004 और 2009 में कांग्रेस को सत्ता दिलाने में अहमद पटेल की बड़ी भूमिका थी। माना जाता है कि चुनाव जीताने में उन्हीं की रणनीति थी।

21 अगस्त 1949 को गुजरात के भरूच जिले में जन्मे अहमद पटेल की राजनीतिक नींव 1976 में पड़ी थी। तब उन्होंने पहली बार निकाय चुनाव में जीत हासिल की थी। वर्ष 1977 में महज 26 साल की उम्र में अहमद पटेल पहली बार लोकसभा चुनाव जीते। तब इमरजेंसी के खिलाफ कांग्रेस के खिलाफ माहौल था, तब भी अहमद पटेल जीतने में कामयाब हुए।

इसके बाद वर्ष 1977 से 1989 के बीच तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए। इसी दौरान 1985 से 1986 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव रहे। अहमद पटेल साल 1993 से पांच बार राज्यसभा के लिए सांसद चुने गए।

जीत के बाद अहमद पटेल ने ट्वीट किया और कहा कि सत्यमेव जयते। अहमद पटेल ने कहा कि यह सिर्फ मेरी जीत नहीं है। यह सत्ता, पैसे और स्टेट मशीनरी के दुरुपयोग की सबसे जबरदस्त हार है। मैं हर एक विधायक को धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने धमकी और भारतीय जनता पार्टी के दबाव के बावजूद मेरे लिए वोट डाले। उन्होंने एक समावेशी भारत के लिए मतदान किया। भारतीय जनता पार्टी का व्यक्तिगत प्रतिशोध और राजनैतिक आतंकवाद का पर्दाफाश हो गया है। गुजरात के लोग इस वर्ष के चुनाव में उन्हें सही उत्तर देंगे।

इससे पहले चुनाव आयोग ने कांग्रेस की शिकायत की जांच के बाद कांग्रेस के 2 विधायक राघवजी पटेल और भोला भाई के वोट को रद्द करने का फैसला किया। इससे पहले 2-2 बार कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर अनावश्यक दबाव बना रही है।

आपको बता दें कि चुनाव आयोग से कांग्रेस से मांग की थी कि इन विधायकों ने सीक्रेसी का उल्लंघन करते हुए अपना वोट वहां मौजूद पोलिंग एजेंट को दिखाया था इसलिए इनके वोट रद्द किये जाएं। जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस की इस याचिका को रद्द करने की मांग की थी लेकिन चुनाव आयोग ने वोटिंग के दौरान का विडियो देखने के बाद भोला भाई और राघवजी पटेल का वोट रद्द कर दिया।