अमरनाथ बस ड्राइवर की हिम्मत से बची 50 लोगों की जान


जम्मू & कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले में सात यात्रियों की मौत समेत 19 से ज्यादा घायल हो गए थे । बस में सभी श्रद्धालु गुजरात के हिम्मतनगर के बताए गए हैं। मृतकों में 5 महिलाएं और 2 पुरुष श्रद्धालु शामिल हैं ।

आपको बता दे कि अगर ड्राइवर सलीम हिम्मत नहीं दिखाई होती तो आज ये और भी भयानक हो सकता था । जम्मू & कश्मीर के अनंतनाग जिले में बाबा बर्फानी के दर्शन करके वापिस आ रहे अमरनाथ यात्रियों की बस पर जब आतंकियों ने हमला बोला और अंधाधुंध फायरिंग करने लगे तब बस के ड्राइवर सलीम ने संयम का शानदार प्रदर्शन किया । जिसकी बदौलत 50 से यात्रियों की जान बच गई ।

ड्राइवर सलीम ने कहा कि उन्होंने बस की तरफ गोलियां चलने की आवाज सुनी। जिसके बाद उन्होंने बस को सुरक्षित जगह ले जाने का फैसला किया और इस बात का खास ध्यान दिया कि कम से कम गोलियां बस तक पहुंच पाए। सलीम का कहना है कि भगवान ने मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी। जिस कारण मैं सुरक्षित स्थान तक पहुंच पाया।

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने ड्राइवर सलीम की तारीफ की। मुख्यमंत्री ने सलीम को बहादुरी पुरस्कार के लिए नामित करने की भी बात भी कही। गुजरात के वलसाड में रहने वाले ड्राइवर सलीम के भाई जावेद ने बताया कि वह सात लोगों की जान नहीं बचा पाया । लेकिन ड्राइवर सलीम ने 50 लोगों को एक सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया उस पर हमें गर्व है।

जम्मू & कश्मीर के अनंतनाग जिले में अमरनाथ यात्रियों की बस पर हुए आतंकी हमले के बाद बस में सवार यात्रियों के बयान के मुताबिक उनकी बस अनंतनाग से 2 km दूर पंचर हो गई थी। जिसे बनाने में देर हो गई। जैसे ही बस निकली आतंकियों ने हमला कर दिया।

बस के एक यात्री के मुताबिक वो लोग 5-6 की संख्या में थे और अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे। हमने ड्राइवर से कहा की बस को भगाता रहो। वहीं का ये भी कहना था कि बस निकलते ही अचानक फायरिंग शुरू हो गई और बस ड्राइवर सलीम ने हिम्मत दिखाते हुए बस नहीं रोकी। और आतंकी सैनिक कैंप तक बस पर फायरिंग करते रहे । ये तो भगवान शुक्र है कि इतने लोगों में से सात लोगों की मौत हो हुई अगर ड्राइवर ने बस नहीं भगाई होती सारे यात्री मारे जाते ।

पुलिस के मताबिक बस नियम विरुद्ध 7 बजे के बाद हाईवे पर गई। आपको बता दे कि 7 बजे बाद हाईवे पर यात्रा की अनुमति नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक यह बस रजिस्टर्ड नहीं थी। रोड ओपनिंग पार्टी, जिसके जरिए लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती थी वो 7:30 बजे वापस आ गई थी। बस पर हमला 8.20 बजे बैटनगो में हुआ जब वो तीर्थयात्रियों को दर्शन करा के बालटाल से मीर बाजार लौट रही थी।

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