हारने के लिए बिहार की बेटी का चयन अनुचित


पटना, (जेपी चौधरी): बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने राष्ट्रपति पद के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के फैसले पर पुनर्विचार करने से इंकार करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को साफ शब्दों में कह दिया कि यदि यह उनकी ऐतिहासिक भूल है तो उन्हें यह करने दीजिए।

श्री कुमार ने श्री लालू प्रसाद यादव के आवास पर आयोजित इफ्तार पार्टी में हिस्सा लेने के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी ने हर पहलू पर गौर कर श्री कोविंद को समर्थन देने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जहां तक बिहार की बेटी को समर्थन देने का सवाल है तो वह इतना ही कहना चाहते हैं कि बिहार की बेटी का चयन जीतने के लिए होना चाहिए था न कि हारने के लिए।

इससे पहले भी जब केन्द्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार थी तब दो बार बिहार की बेटी मीरा कुमार को राष्ट्रपति बनाने का अवसर था लेकिन उस समय उनका चयन नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीमती मीरा कुमार के संबंध में उनकी राय अलग नहीं है। उन्हें भी उनपर गर्व महसूस होता है। केन्द्रीय मंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने काफी अच्छा काम किया है लेकिन सभी को पता है कि इस बार उनका चयन हारने के लिए किया गया है।

उन्होंने कांग्रेस और राजद का नाम लिये बगैर कहा कि यदि सही में वे श्रीमती कुमार को राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं तो वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत की रणनीति बनायें तब ही वे 2022 में उन्हें राष्ट्रपति बना सकते हैं। श्री कुमार से जब यह पूछा गया कि उनके इस फैसले से विपक्ष की एकता को धक्का लगा है तब उन्होंने कहा कि ऐसी रणनीति को वह व्यवहारिक नहीं मानते जिसकी शुरुआत ही हार से होती हो। राष्ट्रपति चुनाव का परिणाम सभी को ज्ञात है और इसमें हार निश्चित है।

उन्होंने कहा कि ऐसी रणनीति बनानी चाहिए जो कारगर हो। वह किसी पर दोष मढऩा नहीं चाहते हैं लेकिन ऐसा नजरिया या दृष्टिकोण नहीं दिख रहा है जो वर्ष 2019 में जीत का मार्ग प्रशस्त कर सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री कोङ्क्षवद का नाम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए पहले घोषित हुआ और उन्हें उनके नाम पर कोई ऐतराज नहीं था। श्री कोङ्क्षवद मूलत: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के साथ की थी।

बाद में वह भाजपा से राज्यसभा के सदस्य बने। बिहार के राज्यपाल के रूप में उन्होंने निष्पक्ष भूमिका निभाई। इसके कारण उनकी पार्टी ने श्री कोङ्क्षवद को समर्थन देने का फैसला लिया। श्री कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीतिक मुकाबले का पद नहीं है इसलिए इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसे मुद्दों पर जदयू पहले से ही अलग निर्णय लेता रहा है।

जब उनकी पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में थी तब राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति चुनाव के दौरान श्री प्रणव मुखर्जी और श्री हामिद अंसारी के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कही गयी थी। तब उन्होंने उसका विरोध किया था। इतना ही नहीं श्री मुखर्जी को राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी ने समर्थन भी दिया था। इसे भूलना नहीं चाहिए।

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