चन्द्रग्रहण के साथ आलू, बालू एवं लालू पर संकट के बादल


पटना : बिहार में सोन नदी के बालू, सब्जी में आलू और नेताओं में लालू काफी लोकप्रिय है, लेकिन इस बार के चन्द्र ग्रहण के साथ इन तीनों पर ग्रहण लग गया है। बिहार के आलू हर लोगों की थाली में लजीज व्यंजन के रूप में परोसा जाता रहा है। सदियों से आलू की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है क्योंकि आलू ही एक ऐसी सब्जी है जो अमीर से लेकर गरीबों के थाली में परोसा जाता है। बिहार के आलू का जवाब नहीं है। लेकिन इस बार मानसून अनुकूल नहीं रहने के कारण आलू की फसले में पाला गिरने के कारण मार खा गया।

वहीं सोन नदी के लाल सोना के नाम से जाने जाना वाला बालू सुर्खियां बटोर रही थी इसमें बालू माफियाओं के कब्जा हो जाने के कारण एवं अच्छी खासी आमदनी को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों का ध्यान आकर्षित करते रहा है। सभी दलके राजनीतिक दल सोन नदी के लाल सोने बालू पर गिद्द दृष्टि लगाये बैठे थे। लेकिन बिहार में महागठबंधन सरकार टूट जाने के बाद तथा नये एनडीए सरकार बनते ही बालू पर काले बादल छाने लगे। इसकी लोकप्रियता पर सवाल खड़ा हो गया। सोन के बालू गरीबों-मजदूरों के भरण पोषण में आमदनी का साधन हुआ करता था।

लेकिन बालू माफियाओं एवं मशीनी युग होने के कारण बालू खाद्यान्नों में मशीन प्रवेश के बाद अवैध खनन होने के कारण मजदूरों द्वारा बालू की निकासी नहीं हो पाता था वहीं मशीनन से बालू उठाव के कारण सोन नदी के आस-पास के गांवों में पानी का घोर संकट उत्पन्न हो गया। साथ ही पर्यावरण की काले बादल छाने लगा। जिसके कारण एनजीटी नई दिल्ली ने अवैध खनन पर रोक लगा दी। इससे सोन के बालू की लोकप्रियता समाप्त हो गयी।

 वहीं बिहार राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की लोकप्रियता प्रकाष्ठा पर थी, लेकिन एक सोंची-समझी घिनौने राजनीति ने उनकी लोकप्रियता पर प्रश्नचिन्ह लगाकर सवाल खड़ा कर दिया। बिहार में सोन के बालू, सब्जी में आलू एवं राजनीतिक में लालू प्रसाद की लोकप्रियता दिनोंदिन बढ़ती जा रही थी।

लेकिन उन राजनीतिक सिपहसलाकारों ने बिहार के तीनों कुनबों की लोकप्रियता पर प्रश्नचिन्ह लगा। आज लालू बालू और आलू पर संकट गहरा गया है। राजद सुप्रीमो के चारा घोटाले को लेकर कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं सोन के बालू पर अवैध खनन को लेकर पुलिस छापेमारी से संकट के बादल छा गया है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को भी बालू में संलिप्तता पाये जाने की बात कही जा रही है।