दलितों का विकास नहीं चाहती कांग्रेस


पटना : पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग के गठन को लेकर कांग्रेस और सहयोगी दलों द्वारा राज्यसभा में डाले जा रहे व्यवधान पर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता, पूर्व विधायक राजीव रंजन ने कांग्रेस तथा उसके सहयोगियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी पिछड़े-अतिपिछड़ों का विकास नहीं चाहतेए वह नहीं चाहते कि उन्हें नौकरी आदि सुविधाओं में सहयोग मिले।

1955 से पिछड़ा-अतिपिछड़ा समुदाय के लोगों की यह मांग रही है कि एससी-एसटी आयोग की तर्ज पर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग का भी गठन हो, जिससे वह भी एससी-एसटी समुदाय के लोगों की तरह समुचित लाभ ले कर देश के विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि आज भाजपा के लाख प्रयास करने के बावजूद भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल छोटे-छोटे तकनीकी चीजों को लेकर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग के गठन में अड़ंगा लगा रहे हैं।

पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग में सालाना 50 से 55 हजार शिकायतें आती हैंए संवैधानिक दर्जा न होने के कारण जिसमें से 1 प्रतिशत शिकायतों का निपटारा भी नहीं हो पाता, जिसके कारण इस समुदाय के लोग मायूस हो लौट जाते हैं। राज्यसभा में अपने बहुमत का दुरूपयोग करते हुए कांग्रेस और उसके सहयोगी न केवल पिछड़े-अतिपिछड़ों की गर्दन पर तलवार चला रहे हैं बल्कि राष्ट्रहित को भी नुकसान पंहुचा रहे हैं। उसके सहयोगियों का विरोध और उनकी संवेदनहीनता समझ में परे है।

एक तरफ कांग्रेस और उसके सहयोगी खुद के पिछड़े-अतिपिछड़ों का सबसे बड़ा हितैषी होने का दावा करते रहते हैं दुसरे तरफ इनके हित के लिए आयोग के गठन पर अड़ंगा डालने में सबसे आगे रहते हैं। कांग्रेस और उनके सहयोगी देश के पिछड़े-अतिपिछड़ों को यह बताएं कि उनकी कथनी और करनी में इतना अंतर क्यों है?

आखिर वही इनके कैसे समर्थक है जो पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग को संवैधानिकता प्रदान करवाने के होकर नाम पर हमेशा पीछे रहते हैं? यह सर्वविदित है कि अगर पिछड़ा-अतिपिछड़ा आयोग को संवैधानिक दर्जा मिल जाएगा तो इस समुदाय के लोगों को नौकरी आदि सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी हो जाएगी।

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