आपदा से बिहार को बहुत हुआ नुकसान


Bihar State

बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 10वें स्थापना दिवस समारोह का द्वीप प्रज्ज्वलित कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के विचारों की तरह आपदा से बचने के उपायों को घर-घर तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। पटना, जेपी चौधरी (पंजाब केसरी): बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के 10वें स्थापना दिवस समारोह का द्वीप प्रज्ज्वलित कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उद्घाटन किया।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी के विचारों की तरह आपदा से बचने के उपायों को घर-घर तक पहुंचाना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि 2005 में जब मैंने बिहार की बागडोर संभाली थी, उस वक्त आपदा से निपटने के लिए कोई कार्ययोजना ही नहीं थी, जिसको देखते हुए आज से ठीक दस साल पहले वर्ष 2007 में बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का गठन किया गया। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी कानून बना था। बिहार ने भी इस दिशा में पहल की जो स्वाभाविक था क्योंकि तरह-तरह की आपदाओं से बिहार को जूझना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 में बाढ़ आयी, जिससे 2.5 करोड़ लोग प्रभावित हुए।

उस समय प्रभावित लोगों को राहत पहुँचाने का लिस्ट नवम्बर में बनता था, तब तक अधिकांश लोग भूल जाते थे लेकिन हमने तत्काल तौर पर प्रभावित परिवारों को 1-1 क्विंटल अनाज दिलवाया और जब हम दरभंगा पहुंचे तो लोग हमें क्विंटलिया बाबा कहने लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार बिहार में जो बाढ़ आई, उसमे 38 लाख प्रभावित परिवारों को प्रति परिवार 6 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से सीधे उनके एकाउंट में मुहैया कराया गया, जिसका मॉनिटरिंग भी किया गया। उन्होंने कहा कि 2 वर्ष पहले बिहार में अगलगी की घटनाएं काफी हुई जो चिंता का विषय था, जिसके बाद एडवाईजरी जारी कर लोगों को सुबह 11 बजे से पहले और शाम 5 बजे के बाद खाना बनाने की सलाह दी गयी। साथ ही पूजा-पाठ में होने वाले हवन के स्थान पर पानी की समुचित व्यवस्था रखने की बात लोगों तक पहुंचाई गयी, जिसका विरोध भी मुझे झेलना पड़ा और कुछ लोग मुझे हिन्दू विरोधी भी मानने लगे। इसको लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में एक व्यक्ति के आक्रोश का भी मुझे सामना करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट का मतलब गार्जियन होता है इसलिए हम सब झेलने के लिए तैयार हैं ताकि बिहार और यहां के लोगों का भला हो सके। मानव जनित और प्राकृतिक आपदाओं से प्रतिवर्ष बिहार को निपटना पड़ता है, जिसमें लोग आपदा के शिकार होते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि छठ पर्व को लेकर प्रशासनिक स्तर पर पूरी तैयारी की गयी थी, जिससे लोग काफी प्रसन्न थे लेकिन समापन होते-होते 47 लोगों के मरने की खबरें पूरे बिहार से आई, जिसको देखकर काफी आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा कि बिहार में वज्रपात से एक ही दिन 52 लोगों के मरने की खबर आई थी और जब इसकी जानकारी हम तक पहुंची तो इसके लिए लिए क्या उपाय किया जायें को लेकर काफी मंथन हुआ।

तब पता चला कि वज्रपात की घटनाओं पर आंध्रप्रदेश में काफी काम हुआ है और वहां एक टीम भेजकर इस बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद वहां की जो नवीनतम तकनीक है, उसे अपनाने और इस नवीनतम तकनीक को अपनाने में आने वाले खर्च को मुख्यमंत्री राहत कोष से खर्च करने का फैसला लिया गया। इसको अपनाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और एक सप्ताह के अंदर सब कुछ तय हो जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा बिहार में बाढ़ और सुखाड़ एक ही समय में आता है, जिससे निपटने के लिए सरकार को पूरे तौर पर प्रतिवर्ष तैयारी करनी पड़ती है क्योकि बिहार में यूपी, एमपी, नेपाल और उतराखंड के कारण बाढ़ का दंश लोगों को झेलना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि इस बार अररिया, किशनगंज और सुपौल में जितना भयंकर बाढ़ आया, उसे देखकर 90 वर्ष की आयु वाले लोग भी आश्चर्यचकित थे, जिसके कारण सिंचाई नहर, गांव की सड़कों के साथ-साथ नेशनल हाईवे और उस पर बने पुलों को जबर्दस्त नुकसान पहुंचा, यह फ्लैश फ्लड की तरह था।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रकृति पर नियंत्रण करने का जो लोगों को भ्रम है, वही विनाश का कारण है क्योंकि बिना कुछ सोचे-समझे हम प्रकृति के साथ बेहिचक छेड़छाड़ कर रहे है, जबकि प्रकृति की ताकत के सामने इन्सान छोटी चीज है। उन्होंने कहा कि हम आपदा पर नियंत्रण नहीं कर सकते लेकिन उससे होने वाली क्षति को कम कर सकते हैं लोगों को जागरूक करके।

2008 के कोशी ट्रेजडी की भयावहता की जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को यह घमंड था कि वह नदी को बांध सकते है लेकिन 40 साल तक कोशी पर बने बांध के कारण सकून से जीने वाले लोगों को नदी तल में हुए सिल्टेशन के कारण भारी तबाही झेलनी पड़ी क्योकि 2008 में जब कोशी का बाँध टूटा उस वक्त कोशी का डिस्चार्ज मात्र 1 लाख 90 हजार क्यूसेक ही था। उन्होंने कहा कि बिहार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीडि़तों का है और ऐसे में आपदा पीडि़तों तक राहत पहुँचाने के लिए 24 घंटा का अल्टीमेटम है, जबकि 4 से 5 घंटे के अंदर अब आपदा पीडि़तों को राहत सरकारी तौर पर मिलने लगी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2.5 करोड़ स्कूली बच्चों को आपदा के ऊपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है, ऐसे में अगर सही तरीके से बच्चे इन बातों को समझ लें तो हम 8 करोड़ लोगों का ओरिएंटेशन करने में कामयाब होंगे।  मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी से काफी लोग खुश है लेकिन हमारे साथ जो लोग मानव-श्रृंखला में खड़े थे, वही अब इसे गलत साबित करने में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बाद बिहार में आपसी झगड़े और घरेलू हिंसा की वारदातों में कमी आई है लेकिन चंद लोग जिसमे सरकारी तंत्र के भी कुछ लोग हैं, इधर-उधर करने में लगे हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पटना के बेली रोड में बेस आइसोलेशन तकनीक से भूकंपरोधी पुलिस भवन बन रहा है, जिसके मध्य में इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर बनाया जा रहा है, जो भयंकर भूकम्प की स्थिति में भी पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। इसके छत पर हेलीकाप्टर रखने की भी व्यवस्था की गयी है ताकि भयंकर आपदा की स्थिति में भी इस भवन में मौजूद लोग राहत कार्य चला सकें। उन्होंने कहा कि बिहार में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए रोडमैप भी तैयार किया गया है, जिसे कैबिनेट से पास भी कर दिया गया है ताकि आपदा की स्थिति से निपटने की हरसंभव तैयारी हो सके। उन्होंने कहा कि पूरे बिहार में बनने वाले पंचायत सरकार भवन के एक कमरे में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जहां पर लोगों को आपदा से बचने के उपायों की जानकारी दी जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में जो काम हो रहा है, उसे सरकार, प्रशासन के साथ आमलोग भी अडॉप्ट करें ताकि आपदा से लोगों को कम से कम क्षति हो, यही हमारी ख्वाहिश है। उन्होंने कहा कि बिहार में सिर्फ 75,000 पुलिसकर्मी हैं और हर घटना का पहला रेसपोंडर पुलिस वाला ही होता है और सबसे पहले घटनास्थल पर उन्हें ही दौडऩा पड़ता है लेकिन अगर हर कोई आपदा से होने वाले नुकसान के प्रति सजग हो जायें तो यह बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में केंद्र से राहत मिलती तो है लेकिन उसे पहुंचने में देर लगती है, जिसमें केंद्र और राज्य का 75:25 का अनुपात होता है। उन्होंने कहा कि जब तक आमजन स्वयं सजग नहीं होते हैं, तब तक हमें व्यावहारिक सफलता इस दिशा में नहीं मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन विभाग हमेशा चुस्त रहता है और हम इसमें कभी सुस्ती नहीं आने देंगे। यह विभाग एक नजीर के रूप में पूरे देश के सामने पेश हो इसके लिए हमारी पूरी कोशिश होगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा आयोजित निबंध एवं नारा प्रतियोगिता में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया। साथ ही मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को भी सम्मानित किया।

इस अवसर पर आपदा प्रबंधन मंत्री दिनेश चन्द्र यादव, बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी, मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, प्राधिकरण के सदस्य डॉ. उदय कांत मिश्र, आपदा प्रबंधन में भूकम्परोधी तकनीकी विषेषज्ञ डॉ. प्रतिमा रानी बोस, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, डीजी होमगार्ड एवं फायर ब्रिगेड पीएन राय, डीजी सिविल डिफेंस रवीन्द्र कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा सहित पंचायतों के प्रतिनिधिगण, एनडीआरएफ एवं एसडीआरएफ के अधिकारी एवं कर्मचारीगण, सरकारी तथा निजी क्षेत्र के अभियंता एवं वास्तुविदगण, इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक की छात्र-छात्रायें, होमगार्ड के जवान एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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