कागजों पर चल रहे हैं सरकार के विकास कार्य


पटना : बिहार विधान सभा की लोक लेखा समिति के सभापति और वरिष्ठ भाजपा नेता नंदकिशोर यादव ने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा बीते तीन वर्षों के भीतर स्वीकृत तीन हजार से अधिक विकास योजनाओं का धरातल पर कहीं अता-पता नहीं है। दूसरी ओर सात निश्चय के नाम पर राज्य सरकार ने नई-नई योजनाओं को लेने की कवायद शुरू कर दी है। पिछले तीन वर्षों के भीतर राज्य सरकार ने साढ़े 13 हजार योजनाओं को मंजूरी दी है।

श्री यादव ने आज यहां कहा कि आपसी खींचतान और वर्चस्व को लेकर छिड़ी महागठबंधन में छिड़ी आंतरिक लड़ाई का सीधा असर राजपाट पर पड़ रहा है। हालत इतनी खराब है कि जिन जनोपयोगी विकास योजनाओं का कार्यारम्भ तक नहीं हुआ है उससे जुड़े विभाग भी राशि को खर्च करने में फिसड्डी साबित हो रहे है। पिछले तीन वर्षों के भीतर ग्रामीण कार्य विकास विभाग की 3028 योजनाओं को सरकार ने मंजूरी दी थी लेकिन 2772 योजनाओं की संचिका सचिवालय में धूल फांक रही है।

चालू वित्तीय वर्ष में इस विभाग ने अब तक राशि भी मात्र 10.36 प्रतिशत ही खर्च की है। पिछले तीन वर्षों के भीतर राज्य सरकार ने साढ़े 13 हजार से अधिक योजनाओं को मंजूरी दे रखी है। लघु जल संसाधन विभाग की 131, भवन निर्माण विभाग की 27, पथ निर्माण विभाग की 44 तथा पीएचइडी की 7 योजनाओं का कार्य तक प्रारंभ नहीं हुआ है।

इन योजनाओं के प्रति सरकार की गंभीरता का अन्दाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही में बजटीय प्रावधान के अलोक में लघु जल संसाधन विभाग ने 5.30 प्रतिशत, भवन निर्माण विभाग 5.48 प्रतिशत, पथ निर्माण विभाग 25.03 प्रतिशत और पीएचइडी मात्र 4.52 प्रतिशत राशि ही खर्च कर सका है।

श्री यादव ने कहा कि एक ओर जहां पुरानी योजनाएं अधर में पड़ी है तो दूसरी और विभागों पर सात निश्चय का लबादा डाल दिया गया है जिसका निर्धारित अवधि के भीतर लक्ष्य पूरा होने से रहा। पथ निर्माण विभाग तो योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए अब तक कैलेंडर भी नहीं बना पाया है क्योंकि इसकी योजनाओं की संचिका को कई विभागों से गुजरना पड़ता है।