विद्यालयों में संसाधनों का घोर अभाव


पटना : बिहार विधानसभा मे प्रतिपक्ष के नेता डा. प्रेम कुमार ने राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि सुबे के हजारों मध्य विद्यालय को उत्क्रमित कर उच्च विद्यालय तो बना दिये गये। लेकिन उन विद्यालयों में आज भी संसाधनों का घोर अभाव है। कई विद्यालय बिना भवन के चल रहें हैं, तो कई उच्च विद्यालय, मध्य विद्यालय के भवन में ही चल रहें हैं। मिडिल के इंटर प्रशिक्षित शिक्षक प्रधान बने हुए हैं और हाई स्कुल में नियोजित शिक्षक जिनकी योग्यता एम. ए. प्रशिक्षित है, वें उनके अधीन है।

जो यह दर्शाता है कि राज्य सरकार किस तरह वरीय षिक्षकों को अपमानित कर रही है। डा. कुमार ने कहा कि सरकार जबाब दें कि कबतक उत्क्रमित उच्च विद्यालय को प्रधान मिलेगा? आखिर कबतक मिडिल के भवन में उच्च विद्यालय चलेगा? उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में कार्यालय सहायक, क्लर्क, पुस्तकालयाध्यक्ष, आदेशपाल की बहाली कबतक होगी? या हाईस्कूल शिक्षक ही विद्यालय का साफ-सफाई, रख-रखाव, नामांकन, फार्म भरने, मुख्यमंत्री साईकिल योजना, पोषाक योजना आदि का काम भी करते रहेंगे।

नेता प्रतिपक्ष ने उन विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अपग्रेड किये गये अधिकांश विद्यालयों में आजतक मानक के अनुरूप शिक्षक बहाल नही कियें गयें है। ऐसी व्यवस्था में छात्रों का भविष्य क्या होगा? ऐसे में वहां नामांकित छात्रों को किस ढंग से शिक्षा मिल रही होगी? इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। डा. कुमार ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार नियोजित शिक्षकों को भी समान कार्य के बदले समान वेतन समय दिया जाए एवं उनके सेवाशर्तों को अविलंब लागू किया जाए।

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