मिश्रा ने राष्ट्रपति को पुस्तकें भेंट कीं


पटना : नई दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द सेराष्ट्रपति भवन में मिलकर डा. जगन्नाथ मिश्र ने उन्हें स्व लिखित 20 पुस्तकें भेंट की। साथ ही अनुसूचित जाति एवं जनजाति की लगातार हो रही उपेक्षा के संबंध में एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि केन्द्रीय विवि में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के प्राध्यापकों की संख्या नगण्य है। बीएचयू में कुल 360 प्रोफेसर मे मात्र एक अनुसूचित जाति के है।

अलीगढ़ विवि में शून्य, जेएनयू में मात्र दो, दिल्ली विवि में तीन जामिया में एक भी नहीं, विश्व भारती में मात्र एक और हैदराबाद केन्द्रीय विवि में एक अनुसूचित जाति के प्रोफेसर कार्यरत है। हैदराबाद केन्द्रीय विद्यालय में मात्र दो रीडर नियुक्त है। वहीं बीएचयू में एक, अलीगढ़ में शून्य, जेएनयू में 11 दिल्ली विवि में नौ, जामिया में एक विश्व भारती में 16 एवं हैदराबाद विवि में 13 प्राध्यापक कार्यरत हैं।

इन आंकड़ों के जरिये यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि 1956 में विवि अनुदान आयोग की स्थापना के बादद से देश में विवि तथा उनके अन्तर्गत आने वाले कॉलेजों में अनुसूचित जाति के 75000 पद अभी भीखाली है। उन पर अन्य गैर दलितों और गैर आदिवासियों का कब्जा है।

डा. मिश्र ने कहा कि अनुसूचित जाति एवंजनजाति पर अत्याचार निवारण अधिनियनम के बिन्दुओं पर केन्द्र सरकार संशोधन करने पर विचार करे और प्रभावित परिवारों को पुनर्वास और उन परिवारों के भरण पोषण का समुचित व्यवस्था केलिए सरकार जिम्मेवारी निर्धायित किया जाये।

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