गंगा को गंदगी से बचाने के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन : ललन सिंह


पटना : गंगा की अविरलता का बाधक है गाद की समस्या। इस समस्या के निवारण हेतु पटना में 25 और 26 फरवरी को अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाया गया था जिसमें बड़े-बड़े गंगा विशेषज्ञ आये थे। गंगा की मुख्य समस्या गाद है। बक्सर से पटना की दूरी 102 किमी है और चार घंटे में पानी यहां पहुंच जाती है वहीं भागलपुर से फरक्का के बीच की दूरी 172 किमी है यहां तक गंगा का पानी पहुंचने में चार दिन लग जाता है इसके चलते 172 किमी के आस-पास जितने भी गांव और छोटे मोटे शहर हैं वे सभी बाढ़ के चपेट मे आ जाते हैं। इसके बारे में केन्द्र सरकार आज तक विचार नहीं कर पायी। ये बातें आज जल संसाधन विभाग के मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन ङ्क्षसह अपने कार्यालय में पत्रकारों से वार्तालाप करते हुएकही। श्री सिंह ने कहा कि गाद के समाधान के लिए नई दिल्ली में 18 एवं 19 मई को इंटरनेशनल सेंटर में राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित की जा रही है। इस सम्मेलन का उदघाटन सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया जायेगा। सम्मेलन में विश्व विख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे, स्वामी अविमुक्तनंद, विख्यात पर्यावरण विद जीडी अग्रवाल, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बी गोपाल गौरा, सांसद जयराम रमेश, जलपुरूष राजेन्द्र सिंह, देश विदेश से विद्वतजन भाग लेगे। वहीं बिहार विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने पांच राज्यों जो गंगा किनार बसा है उनको पत्र लिखा है कि आप अपने क्षेत्र से पांच पांच विधानसभा प्रतिनिधि भेजे, ताकि गाद की समस्या की जानकारी हो सके। यह पत्र उतर प्रदेश, उतराखंड, पश्चिम बंगाल और झारखंड को दिया गया है।

उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में बाढ़ से लोग तबाह हैं। उन्होंने कहा कि गंगा भारत की जीवन रेखा है यह केवल नदी ही नहीं आपूर्ति भारत की आस्था संस्कृति पर बना सभ्यता स्वर्णिम इतिहास, प्रेरणा और पूजा है। अविरल गंगा नदी का बहना बंद होने का अर्थ है कि उस नदी का मृत्यु हो जाना है। आज विश्व सर्वाधिक प्रदूषित नदियों में गंगा एक है। गंगा के जल ग्रहण क्षेत्र में जंगलों और विनाश में बड़ी तादाद में भूमि क्षरण और कटाव बढ़ा है। गंगा के संपूर्ण प्रभात से गंगा के मार्ग गाद से पट चुका है। पानी की कमी से बीच के टापू मर जाते हैं। गंगा नदी के तल पर पूरे प्रभाव मार्ग से भारी गाद भरने से कई मीटर ऊपर आ चुका है। अक्सर देखा गया है कि बर्षा का बाढ़ पानी में गहराई नहीं होने के चलते जमीन के किनारे फैलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरी बात यह है कि केन्द्र सरकार ने चितले समिति बनायी थी जो तीन महीने स्थल का निरीक्षण नहीं किया और आज दिल्ली में ही बैठकर बोला कि गाद नहीं है। गंगा कई राज्यों से बहता है मगर उतराखंड में लोग गंगा का पानी पी सकते हैं लेकिन हमारे यहां जो गंगा बहती है उसमें से हमें पानी लेने की भी अनुमति नहीं है। अगर गंगा का पानी फिल्टर करके लोगों तकप हुंचाया जाये उसके भी हमें अनुमति नहीं है। इसके लिए भी मैं केन्द्र स रकार से मांग करता हॅू कि हमारे शहर से गंगा का पानी जा रही है और गंगा का पानी दूसरे लोग प्रयोग कर रहे हैं हमें भी गंगा का पानी लेने का अनुमति प्रदान करें।

– जेपी चौधरी

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