राजद-जदयू का झगड़ा नूरा-कुश्ती


पटना : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रेस वार्ता कर कहा की राजद और जद (यू.) का कथित आपसी विवाद के संबंध में प्रारंभ से ही हम इस विचार के रहे हैं कि राजद और जद (यू.) का झगड़ा वास्तविक नहीं है बल्कि नूरा कुस्ती है। इस नूरा कुस्ती को सबलोग देख रहे थे पर राज्य में हो रहे महिलाओं का बलात्कार, रिश्वरतखोरी की घटना और विकास का कार्य ठप रहने की घटना को लोग भूल रहे थे।

यही नीतीश कुमार, लालू प्रसाद यादव चाहते थे क्योंकि चुनाव के समय जनता से किये हुए सारे वादाओं में एक वादा भी पूरा करने में महागठबंधन की सरकार असक्षम रही है। इसका जबाब इन दोनों के पास नहीं था। इसके लिए जनता का ध्यान समस्याओं से हटा कर बनावटी जद (यू.) और राजद का झगड़ा किया गया। उन्होंने कहा कि इस बात से भी साबित हो रहा है कि नीतीश कुमार राज्य के कई-एक नेताओं से मामूली मामूली धाराओं में एफ. आई. आर. होने के बाद त्यागपत्र ले लिया था।

अब कौन सी बातें सामने आ रही हैं जिसके चलते नीतीश कुमार तेजस्वी प्रसाद को बार-बार समय देते जा रहे हैं। यह उनकी कमजोरी है, जो उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी जाने की भय से उपजी है। श्री मांझी ने कहा की बाहर के बैठकों में तेजस्वी यादव के नेम प्लेट ढ़कते हैं या हटाते हैं तथा राजद के मंत्री को साथ बैठाने में परहेज करते हैं, पर मंत्रिमंडल की बैठको में तेजस्वी प्रसाद यादव को नम्बर दो की कुर्सी पर आसिन होते देखने में उन्हें किसी प्रकार का संकोच नहीं होता। यह सत्ता का लोभ एवं भय के सिवा कुछ नहीं है।

तेजस्वी प्रसाद यादव से मिल कर माननीय नीतीश कुमार क्या स्पष्टीकरण चाहते हैं? जबकि मामला सी.बी.आई. एवं आर्थिक अपराध संगठन के साथ है। नीतीश कुमार एवं उनका पद कोई न्यायालय के समरूप होता तो लिखित सम्मन पर तेजस्वी प्रसाद यादव को बुलाते और मामला तय करते पर ऐसा है नहीं। इस प्रेस वार्ता में पूर्व सासंद ब्रहमदेव आनंद पासवान, प्रदेश प्रवक्ता विजय यादव, प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अनामिका पासवान, प्रदेश प्रवक्ता राम विलास प्रसाद, प्रदेश मीडिया प्रभारी अमरेन्द्र कुमार त्रिपाठी आदि नेता मौजूद थे।