नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए सजायफ्ता लालू प्रसाद का समर्थन ले रहे हैं : भाजपा


पटना : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद व्यवस्था को प्रभावित करने में माहिर हैं उन्हें समय मिला तो वे कुछ भी कर सकते है। ये बातें आज भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी जनता दरबार के बाद अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा।  श्री मोदी ने कहा कि नौ महीने में चारा घोटाला के सभी मामले में षड्यंत्र के धारा शामिल करते हुए अलग-अलग ट्रायल कराने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भारतीय जनता पार्टी स्वागत करती है। नौ सौ कराड़ चारा घोटाला में लालू प्रसाद के खिलाफ इतने सबूत हैं कि बाकी उन्हें चार मामले में देश के सर्वोच्च न्यायालय निश्चित रूप से सजा देगी। अब अगले बीस वर्षों तक लालू प्रसादद यादव मुखिया का भी चुनाव नहीं लड़ पायेंगे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लालू प्रसाद को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

परिवार के बाहर भी किसी को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर देना चाहिए। लालू प्रसाद को चारा घोटाला में जेल भेजवाने और सजा दिलवाने भाजपा और नीतीश कुमार, शिवानंद तिवारी एवं ललन ङ्क्षसह जी की बड़ी भूमिका रही है। यह बात अलग है कि नीतीश कुमार ने मुख्यंत्री की गददी बचाने के लिए लालू प्रसाद से समझौता कर लिया। परंतु भाजपा अपाराध भ्रष्टाचार के प्रयाय माने जाने वाले लालू प्रसाद एवं उनको संरक्षण देने वाले नीतीश कुमार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट इस फैसले से नीतीश कुमार को सर्वाधिक खुशी होगी। क्योंकि शहाबुद्दीन से मोबाइल वार्ता से और हजार करोड़ से अधिक बेनामी संपत्ति के खुलासे में फंसे लालू प्रसाद यादव अगले नौ माह तक कोर्ट कचहरी एवं तारीख और मुकदमा में फंसे रहने के कारण नीतीश सरकार के सामने कोई संकट पैदा नहीं कर पायेंगे। श्री मोदी ने कहा कि नीतीश कुमार चारा घोटाला का सजायफ्ता और माफिया डॉन राजद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रखने वाले लालू प्रसाद जैसे लोग को रखकर नरेन्द्र मोदी और भाजपा से मुकाबला नहीं कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट के टिप्पणी से लालू प्रसाद पर कॉन्फे्रसिंग की धाराओं को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीशस राजेश रंजन प्रसाद द्वारा हटाये जाने के निर्णय से सुप्रीम कोर्ट अत्यंत कठोर टिप्पणी की है।

राकेश रंजन प्रसाद फरवरी 2016 में मणिपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा सितम्बर 2016 में मुख्य न्यायाधीश बनाये गयेे थे। अगर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नहीं बनाये गये तो वे 30 जून को सेवाृिनवत हो जायेंगे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजिओउ को कोर्ट की जज के संबंध में टिप्पणी पर संज्ञान लेनी चाहिए। क्योंकि जूडिशियान अपवाटमेंट को लेकर काफी चर्चा हो रही है। सीबीआई भूमिका पर भी सवाल है। झारखंड हाई कोर्ट निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने पर भी विलम्ब पर भी कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। जिस समय रांची कोर्ट का फैसला आया था उस समय सीबीआई के डायरेेक्टर रंजीत सिन्हा थे। सीबीआई डायरेक्ट कोर्ट में विलम्ब के लिए दोषी व्यक्ति को चिन्हित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद व्प्यवस्था को प्रभावित करने में महारत हासिल की है। लालू प्रसाद ने पटना हाई कोर्ट में सीबीआई जांच निर्णय का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट तक भी गये थे। लालू प्रसाद के अत्यंत करीबी रंजीत सिन्हा को सीबीआई में डीआईजी थे जिन्हें लालू का पक्ष लेने पर जांच से अलग कर दिया गया था। रंजीत सिन्हा श्री प्रसाद जब रेल मंत्री के नाते आरपीएफ का डीजी बनाया और फिर बिहार  भवन में ओएसडी बनाकर रखा। रंजीत सिन्हा को सीबीआई का डायरेक्टर बनवाने में लालू प्रसाद अपने वीटो को भी इस्तेमाल किया। झारखंड हाई कोर्ट में जब मामला चल रहा था उस समय रंजीत सिन्हा सीबीआई के डायरेक्टर थे। सीबीआई और झारखंड उच्च न्यायालय में में रंजीत सिन्हा के प्रभाव से तथ्यों को ठीक से नहीं रखा गया और लालू प्रसाद को मदद पहुंचाने की कोशिश की। रंजीत सिन्हा पर सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों से मिलने के आरोप में केस दर्ज करने का आदेश दिया। अब सुप्रीम कोर्ट चारा घोटाला से जुड़े सभी केस को नौ महीने मंं निष्पाादन कर लिया जायेगा। इसके लिए विशेष टीम का गठन कर लेनाचाहिए। इसकी मॉनिटरिंग सीबीआई के डायरेक्टर को करनी चाहिए।

– जेपी चौधरी

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