बिहार में शिक्षकों पर गिरी गाज


पटना, (जेपी चौधरी): बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में नवगठित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षा के खराब परिणाम को गंभीरता से लेते हुए कहा कि वर्ष 2017 में हुई वार्षिक परीक्षा में जिन शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों का प्रदर्शन खराब हुआ है, उन्हें चिन्हित कर दंडित किया जाएगा। मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री श्री कुमार की अध्यक्षता में यहां हुई शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद बताया कि वर्ष 2017 में राज्य के जिन जिलों के विद्यालयों से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा परिणाम खराब हुआ है या वहां से एक भी छात्र-छात्राएं उत्तीर्ण नहीं हो पाये हैं, वहां के शिक्षा पदाधिकारियों, प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों को चिन्हित कर दंडित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए ठोस कार्यक्रम तीन माह में लागू किये जाएंगे। श्री सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) को छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक प्रगति को और बेहतर बनाने के लिए मॉडल प्रश्न पत्र को उत्तर सहित तैयार कर विद्यार्थियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा बीएसईबी को परीक्षा प्रणाली और उत्तर पुस्तिकाओं की मूल्यांकन व्यवस्था को और बेहतर बनाने को कहा गया है सूरज सतीश रमेश मुख्य सचिव ने बताया कि उच्च शिक्षा हासिल करने की चाहत रखने वाले विद्यार्थियों को सहयोग करने के उद्देश्य से सात निश्चय के तहत शुरू की गई स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को नवगठित सरकार में भी जारी रखते हुए पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति कार्यक्रम को भी चालू रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक पंजीकृत सोसाइटी का गठन कर उसके माध्यम से दोनों योजनाएं (स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति) कार्यान्वित की जाएंगी। श्री सिंह ने राज्य में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में वृद्धि को सरकार का मुख्य उद्देश्य बताया और कहा कि अब मात्र एक प्रतिशत बच्चे ही विद्यालय से बाहर रह गये हैं। इनमें अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चे एवं आर्थिक-सामाजिक रूप से अत्यंत पिछड़े वर्ग के बच्चे ज्यादा हैं। इन बच्चों को विद्यालय से जोडऩे एवं उम्र के अनुसार शिक्षा के लिये आवासीय शिक्षण की व्यवस्था अल्पसंख्यक कल्याण विभाग एवं अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग से आर्थिक सहयोग प्राप्त कर शिक्षा विभाग द्वारा की जाएगी।

मुख्य सचिव ने बताया कि जिन 947 प्राथमिक विद्यालय को भूमि प्राप्त हो गयी है, उनका भवन निर्माण राज्य सरकार के संसाधनों से कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी विषय में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये शीघ्र ही विद्यालयों में ई-लर्निंग की व्यवस्था शुरू करायी जाएगी। पहले इसे पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया जाएगा और बाद में प्राप्त अनुभव के आधार पर इसका विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उच्च विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए शिक्षक नियोजन के लिये केन्द्रीयकृत व्यवस्था बनाई जाएगी।

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