कोविंद को समर्थन देने पर हायतौबा क्यों?


पटना : रालोसपा के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विनोद चौधरी निषाद, प्रदेश महासचिव कुमारी ज्योति, मनोज कुमार गुडडू, संजीत कुमार चौधरी एवं पार्टी प्रवक्ता मनोज लाल दास ‘मनु’ ने कहा कि राष्ट्र्पति के लिए घोषित एन.डी.ए. उम्मीदवार के पक्ष में जदयू का आने पर हाय तौबा मचाना उचित नहीं है। किसी भी गठबंधन में कोई भी दल निर्णय लेने को स्वतंत्र रहता है। नीतिश कुमार द्वारा रामनाथ कोविन्द का समर्थन करना उनके पार्टी का फैसला है, इस पर लालू-कॉग्रेस के नेताओं का बोलना कहीं से उचित नही है।  वर्ष 2012 में नीतिश कुमार जब एन.डी.ए. में शामिल थे तब उन्होने एन.डी.ए. उम्मीद्वार के बजाय यू.पी.ए. उम्मीद्वार प्रणव मुखर्जी को एन.डी.ए. में रहते वोट दिया था।

उस समय लालू प्रसाद, रघुवंश बाबू अथवा कॉग्रेस के कोई नेता ने नहीं कहा था कि नीतिश कुमार गठबंधन धर्म का पालन नही किया। जब नीतिश कुमार ने इस बाद एन.डी.ए. को समर्थन किया तो लालू प्रसाद एवं अन्य नेताओं द्वारा चिल्ला पौं मचाने की क्या जरूरत है। जनाधार विहिन बिन पेंदी के लोटा की तरह मात्र सांसद विधान पार्षद के लिए इधर उधर भटकने वाले शिवानन्द तिवारी के द्वारा राष्ट्रपति चुनाव को गुजरात चुनाव से जोडऩे के बयान को महज मीडिया में रहने व लालू को खुश करने वाला बयान दिया है। श्री तिवारी लालू प्रसाद की चाटुकारिता इसलिए कर रहे हैं कि लालू प्रसाद उन्हे राज्य सभा भेज दें। परन्तु दूध का जला छॉछ फूंक कर पीता है, लालू प्रसाद के समक्ष श्री तिवारी जैसे दल-बदलू नेताओं का उपयोग मात्र भाट के लिए है।

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