योगी सरकार में महिलाएं-अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं


पटना : ऐपवा की महासचिव व भाकपा-माले की केंद्रीय कमिटी की सदस्य मीना तिवारी ने कहा है कि यूपी में जब से योगी की सरकार आई है, संविधान व लोकतंत्र की लगातार धज्जियां उड़ायी जा रही हैं। सामंती-अपराधियों का मनोबल आसमान छू रहा है और सहारनपुर से लेकर मिर्जापुर तक दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर बर्बर किस्म के हमले की बाढ़ सी आ गयी है। उन्होंने कहा कि सबसे हालिया घटनाक्रम में मिर्जापुर जिले में ऐपवा व माले की नेता जीरा भारती पर बर्बर तरीके से सामंती-दबंगों ने हमला किया।

जब वे मिर्जापुर प्रखंड कार्यालय से अपने गांव रिक्सा खुर्द लौट रही थीं, सामंती ताकतों ने उनके ऊपर बर्बरता से हमला किया और उन्हें जमीन पर गिरा दिया। उन्हें लात-घूंसों से मार कर अधमरा कर दिया। उनके साथ उनका 14 वर्ष का बेटा भी था। दलित समुदाय से आने वाली जीरा भारती 2014 में भाकपा-माले की ओर से लोकसभा का चुनाव लड़ चुकी हैं और इलाके की जबरदस्त नेता हैं। पिछले समय में उन्होंने अपने इलाके में मजदूरी के सवाल पर जबरदस्त आंदोलन का नेतृत्व किया था।

जिसके दबाव में प्रशासन को मजदूरी की दर बढ़ाकर 100 रु। करनी पड़ी थी। सामंती ताकतें इसी से खार खाए बैठी थीं। योगी राज में इनका मनोबल बढ़ा और इस तरह की शर्मनाक घटना सामने आई। इस बर्बर हमले के खिलाफ आगामी ऐपवा द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिवाद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व बनारस में भाकपा-माले कार्यालय पर छापेमारी की गयी।

जो यह साबित करता है कि जोगी राज में लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे प्रतिवाद को भी सरकार दबाने पर पूरी तरह आमदा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में दलितों के सवालों को लेकर यूपी प्रेस क्लब में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करने वाले बुद्धिजीवियों की गिरफ्तारी भी बेहद निंदनीय है। पुलिस ने घुस कर प्रोफेसर रमेश दीक्षित, पूर्वपुलिस अधिकारी एसआर दारापुरी, रामकुमार, आषीश अवस्थी, पीएस कुरील को गिरफ्तार कर लिया है। यह लोकतंन्त्र के मुंह पर कालिख है और इसका हर स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए।

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