अब घाटी के पत्थरबाजों से निपटेगा ‘कैप्सूल बम’


कन्नौज : सुगंध व इत्र कारोबार में पहचान बनाने वाले कन्नौज अब बदबू में भी नाम रोशन करेगा। यह बदबू कश्मीर में उपद्रव कर रहे पत्थरबाजों को सबक सिखाने का काम करेगी। सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र कुछ वर्ष पहले बदबूयुक्त कैप्सूल (स्मेल टेरर) तैयार करने में सफल रहा था। रक्षा मंत्रालय समेत डीआरडीओ में इस पर शोध की तैयारी की जा चुकी है।

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सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही कैप्सूल का ट्रायल भी किया जाएगा। खास तरह के इस कैप्सूल के फूटने पर भीषण दुर्गंध उठने से उपद्रवी कुछ पल भी उस स्थान पर नहीं ठहर सकेंगे। सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला, सहायक निदेशक एपी सिंह की देखरेख में यहां के वैज्ञानिकों द्वारा बदबू से निर्मित इस कैप्सूल को करीब डेढ़ साल पहले केंद्रीय सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योग राज्यमंत्री गिरिराज सिंह को दिखाया जा चुका है। वह एफएफडीसी में प्रदर्शनी के दौरान आए थे।

भारतीय सेना बतौर हथियार कर सकती है प्रयोग
इसकी विशेषताओं को लेकर राज्यमंत्री ने रक्षा मंत्रालय को पत्र भी लिखा था। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की विशेष अनुसंधान शाखा में इसके ट्रायल के निर्देश दिए गए। टीम ने प्रधान निदेशक से फोन पर संपर्क भी साधा। अब यह टीम इसका ट्रायल कर भारतीय सेना में बतौर हथियार इसको शामिल करने का प्रयास भी करेगी। प्रधान निदेशक ने बताया कि डिफेंस लैब ग्वालियर के रक्षा वैज्ञानिकों ने ट्रायल को लेकर संपर्क किया है। वह कब तक यहां आएंगे, यह जानकारी नहीं है। इसकी मारक क्षमता बेहतर है। यह कैप्सूल कई खूबियों से भरा है। अभी पूरी तरह से सहमति नहीं मिल पाई है। वैज्ञानिकों के हरी झंडी दिखाने पर बात आगे बढ़ेगी।

आखिर इस बदबू का कैसे होगा इस्तेमाल
बदबू युक्त कैप्सूल का इस्तेमाल करने के लिए कांच की शीशियों का इस्तेमाल किया जाएगा। जवानों को टियर गन व दंगा निरोधक वैन के टियर थ्रो में कैप्सूल को रखकर चलाना होगा। इनके जमीन पर गिरने के साथ तेज धुआं निकलेगा। विशेष तरह की इस बदबू में डाले गए केमिकल के कारण उपद्रवियों को दिक्कत होगी। इससे कुछ देर में ऐसे लोग भागने को मजबूर हो जाएंगे।

जल्द ही किया जाएगा परीक्षण
एफएफडीसी के प्रधान निदेशक शक्ति विनय शुक्ला ने कहा कि दुर्गंध फैलाने वाले रसायन को एक छोटे कैप्सूल में रखा जाएगा। ग्वालियर की रक्षा प्रयोगशाला में जल्द ही इसका परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल होने के बाद सेना इसका उपयोग कर सकती है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह की पहल पर रक्षा मंत्रालय ने इसके परीक्षण को मंजूरी दी है।

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इस गंध (बदबू) का स्वास्थ्य पर असर नहीं
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और रक्षा मंत्रालय की आवश्यक मंजूरी और स्वीकृति के बाद इसे सेना को सौंपा जाएगा। कैप्सूल की गंध ही असहनीय है लेकिन व्यक्ति के स्वास्थ्य पर इसका कोई असर नहीं होता है।

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