योजनाएं दिल से बनें तो अधिक प्रभावी होंगी


रायपुर : मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि योजनाएं दिल से बनायी जाएं, तो वे अधिक प्रभावी और अच्छे परिणाम देने वाली साबित होंगी। उन्होंने कहा कि वनवासियों की पीढिय़ों के लिए जंगलों को बचाने और लघु वनोपजों से जंगलों को समृद्ध करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जंगलों के समीप रहने वाले वनवासियों की आजीविका बहुत कुछ जंगलों पर ही निर्भर है।

मुख्यमंत्री नया रायपुर स्थित योजना भवन में सतत विकास लक्ष्यों और प्रशासनिक सुधारों पर केन्द्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। इस संगोष्ठी का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग, छत्तीसगढ़ राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग और नेशनल फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी में कहा कि राजधानी रायपुर, भिलाई और दुर्ग को देखकर छत्तीसगढ़ के विकास को नहीं समझा जा सकता। जब बस्तर और सरगुजा के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा, तभी वास्तव में सतत विकास लक्ष्यों को हासिल किया जा सकेगा।

राज्य शासन द्वारा भी अंतिम व्यक्ति के जीवन ने बेहतर बदलाव लाने के लिए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रशासनिक अधिकारी समाज, गरीब और पिछड़े व्यक्तियों के लिए संवेदनशीलता के साथ काम करेंगे, तो विकास और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर परिणाम मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने नये राज्य छत्तीसगढ़ के गठन के समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि दूरस्थ अंचलों में बेहतर बदलाव के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में नये प्रयोग किए। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा के क्षेत्र में पोटा केबिन स्कूलों की शुरूआत की गयी। क्योंकि यहां नक्सलवादियों ने सैकड़ों स्कूलों को नष्ट कर दिया था।

शिक्षक इन क्षेत्रों के स्कूलो में जाना नहीं चाहते थे। बस्तर के 70 पोटा केबिनों में हजारों बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था की गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दंतेवाड़ा में एजुकेशन हब की शुरूआत की गयी, जहां लगभग छह हजार बच्चे आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों के लिए प्रयास विद्यालयों के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग की व्यवस्था की गयी, जिसके परिणाम स्वरूप सैकड़ों बच्चे आज इंजीनियरिंग, डॉक्टरी और आईआईटी जैसे उच्च शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

उन्होंने प्रदेश के नक्सली चुनौती का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी ही नक्सल समस्या का समाधान ढूंढेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से आज दंतेवाड़ा और बीजापुर में बड़ी संख्या में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ अपनी सेवाएं दे रहा हैं।

राज्य सरकार द्वारा दूरस्थ अंचलों में सड़क, रेल और एयर की बेहतर कनेक्टिविटी देने के सतत प्रयास कर रही है। आने वाले एक वर्ष में प्रदेश के सभी गांवों और मजरे-टोलों में बिजली पहुंचा दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में धान के उत्पादन, उपार्जन और वितरण की पुख्ता व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के साठ लाख परिवारों तक बिना लीकेज के हर माह खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।

राज्य सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर ग्यारह हजार करोड़ रुपए मूल्य का धान उपार्जित करती है। लघु वनोपजों की समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए भी राज्य सरकार द्वारा व्यवस्था की गयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु वनोपजों से जंगलों को समृद्ध करने के लिए चार, चिरौंजी, महुलाईन पत्ता और तेंदूपत्ता के पौधे ट्श्यिू कल्चर के माध्यम से बड़ी संख्या में तैयार करके इन्हें जंगलों में रोपने की आवश्यकता है। उन्होंने साल वृक्षों की साल बोरर कीट से रक्षा के लिए अनुसंधान कार्य की जरुरत भी बतायी। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, प्रति व्यक्ति बिजली की खपत प्रदेश में 1760 यूनिट है, जो पंजाब और हरियाणा जैसे विकसित राज्यों से अधिक है। उन्होंने इस संगोष्ठी में शामिल हो रहे विद्वानों का छत्तीसगढ़ में स्वागत किया।

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