जीएसटी लागू होने से पहले मची खलबली


रायपुर : जुलाई 2017 से देश में एक साथ लागू किए जाने वाले जीएसटी वस्तु एवं सेवाकर लागू होने से एक सप्ताह पहले इसे लेकर भारी खलबली है। नया कानून लागू होने से पहले व्यापारी समुदाय इसे लेकर विचलित लग रहा है। जाहिर है उनकी प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया में खुल-खुलकर सामने आ रहीं हैं। व्यापारियों को सबसे अधिक चिंता इस कानून में जेल भेजने के प्रावधान को लेकर है। एक साल में 36 बार हिसाब का ऑनलाईन ब्यौरा देना है। इसे लेकर माथे पर पसीना छलक रहा है।

सोशल मीडिया में इस मुद्दे पर चल रही चर्चा के मुताबिक बड़ी संख्या में लोग वित्त मंत्री, सरकार को निशाना बना रहे हैं। बात यहां से शुरू हो रही है कि जब भाजपा विपक्ष में थी इसी कानून कड़ा विरोध था, अब लागू करने के लिए उतनी ही बेताबी। यूपीए के जीएसटी में 14 प्रतिशत, एनडीए सरकार में 28 प्रतिशत क्यों? ऐसे सवालों के बीच केन्द्र व राज्य सरकारें लगातार इस प्रयास में हैं कि जीएसटी एक देश एक कानून को लागू करते समय देश का जनमानस साथ हो। प्रतिदिन व्यापक पैमाने पर प्रचार कर नए कानून के पहलुओं को समझाने की कोशिश की जा रही है। राज्यों की विधानसभाओं में इस जीएसटी संबंधी विधेयक पारित हो चुके।

सारी कोशिशों के बाद भी माना जा रहा है कि इस कानून के बारे में अभी भी भ्रांतियां बनी हुई हैं। कारण यह है कि नासमझी में भी लोग प्रावधान नहीं समझ पाएं हैं। कई बड़ी पेचीदगियों की आशंका भी है जिसका खुलासा कानून लागू होने के बाद हो पाएगा। छत्तीसगढ़ में जीएसटी के पंजीयन के लिए तारीख फिर से बढ़ाई गई है। बताया जा रहा है कि अब तक 80 प्रतिशत से अधिक व्यापारियों का पंजीयन हो चुका है, लेकिन व्यापारियों का सिग्नेचर जमा करने में भारी परेशानी तकनीकी कारणों से हो रही है। गुस्सा फूटा सोशल मीडिया पर: जो लोग जाने-अनजाने में समझे-बूझे बिना जीएसटी के भारी विरोध में आ गए हैं वे भारी कड़ी टीका टिप्पणी कर रहे हैं। सामने आ रहे ट्रेंड के मुताबिक लोग नाराजगी में भाजपा को 2014 में वोट देने को गलती मान रहे हैं।

कुछ पोस्ट में कहा जा रहा है कि वित्त मंत्री की केतली ठंडी करों, लेकिन जैसे जुलाई 2017 की तारीख सामने आती जा रही है वैसे ही तनाव बढ़ता दिख रहा है। व्यापारियों के संगठनों वे अपनी बात रखने के लिए सोशल मीडिया पर संगठित कैंपेन भी चला रखा है। व्यापारियों के साथ विरोधी राजनीतिक दल भी मुद्दे को हवा देने के प्रयास में लगे हैं। हर तरह की प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ लोग से आने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव के संभावित परिणामों से भी जोड़ रहे हैं। ऐसे एक समूह ने जीएसटी के खिलाफ जो अभियान चलाया है उसके मुताबिक जीएसटी यानि गई सरकार तुम्हारी। सोशल मीडिया जानकारों की राय में यह एक सोशल जुमलेबाजी से अधिक कुछ नहीं है। प्रतिक्रियाएं व्यक्त करने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। ऐसे बहुत से विचार खुद भी फैलते हैं। फैलाए भी जाते हैं।

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