कर्ज से बेहाल कृषक ने की थी आत्महत्या


रायपुर: मुख्यमंत्री के गृह जिले में गत 19 जुलाई को कर्ज से बेहाल कृषक संतोष साहू द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में मिले सुसाइड नोट में सीधे-सीधे राज्य सरकार और जिला प्रशासन को दोषी ठहराया गया है। हालांकि पुलिस ने इस सुसाइड नोट को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन मृतक के परिजनों ने सुसाइड नोट में इसी तरह की बातें लिखी होने की जानकारी दी है। पीडि़त कृषक हटकी कर्ज से भी लदा था। कांग्रेस की मांग है कि पीडि़त परिवार को तत्काल एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए वहीं हटकी जैसी कुप्रथा को तत्काल बंद कराया जाए।

कांग्रेस द्वारा गठित जांच दल ने कवर्धा जिले के पिपरिया थाना अंतर्गत ग्राम डेहरी निवासी कृषक संतोष साहू के गांव पहुंचकर आत्महत्या के कारणों की जांच की। मृतक के परिजनों और ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार मृतक ने हटकी कर्ज लिया हुआ था, वहीं उसकी जमीन का डायवर्सन भी रूका हुआ था। इन बातों से क्षुब्ध होकर ही संतोष साहू ने आत्महत्या कर लिया।

कांग्रेस भवन में आयोजित एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस जांच दल के सदस्यों धनेन्द्र साहू, रविन्द्र चौबे और मोहम्मद अकबर और पीसीसी चीफ भूपेश बघेल ने संयुक्त रूप से कृषकों की मौतों के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया। जांच दल के सदस्यों ने बताया कि मृतक संतोष साहू गुड़ फैक्ट्री खोलना चाहता था।

इसके लिए उसने अपनी जमीन डायवर्सन के लिए दी हुई थी। डायवर्सन के लिए उसने करीब 50 हजार रूपए की राशि भी दी थी, लेकिन इसके बाद भी उसका काम नहीं हो पाया था। कांग्रेस जांच दल के सदस्यों ने बताया कि मृतक किसान की मांग फेंकन बाई, उसके पांच भाई हिरामणी, हुकूम, केदार लाल, दिनेश, रेशम व उसके बेटे उमेश और अन्य परिजनों ने बताया कि पंचनामा के दौरान पुलिस ने एक सुसाइड नोट पढ़कर सुनाया जिसे मृतक ने लिखा था।

जांच दल को ग्रामवासियों ने यह भी बताया कि कवर्धा जिले में आज भी हटकी सुदखोरों का आतंक है। मृतक भी सुदखोरों से कर्ज लिए था, इसके अलावा उसकी ढाई एकड़ जमीन बिक जाने और बैंक एवं सहकारी समिति के बकाया कर्ज से भी वह बेहाल था।

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