भष्ट्राचार के मुद्दे का भाजपा ने किया विरोध


नई दिल्ली: राज्यसभा में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के एक मंत्री की पत्नी द्वारा कथित तौर पर वन विभाग की जमीन खरीदे जाने का मुद्दा उठाने का प्रयास किया लेकिन इसका सत्ता पक्ष ने तीखा विरोध किया और कहा कि राज्य का विषय होने के नाते इस पर यहां चर्चा नहीं हो सकती। इस विषय पर चर्चा के लिए कांग्रेस के पी.एल. पूनिया और प्रमोद तिवारी ने नियम 267 के तहत नोटिस दिया था।

शून्यकाल में संसदीय कार्य राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कांग्रेस सदस्यों का विरोध करते हुए कहा कि राज्य का विषय होने के नाते इस पर यहां चर्चा नहीं हो सकती। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर राज्य के विषयों पर चर्चा की यहां अनुमति दी गयी तो विपक्ष शासित राज्यों से जुड़े मुद्दे भी उठाना चाहेंगे। बहरहाल, उपसभापति पी.जे. कुरियन ने नियम 267 के तहत दिए गए नोटिस को नामंजूर कर दिया।

इसके पहले सपा के नरेश अग्रवाल ने एक हिंदी दैनिक में उच्च सदन के बारे में प्रकाशित एक आलेख का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसमें सदन की अवमानना की गयी है। उन्होंने शून्यकाल में व्यवस्था के प्रश्न के तहत यह मुद्दा उठाया और कहा कि आलेख में इस सदन के बारे में कई ऐसी टिप्पणियां की गयी हैं जिनसे सदन के विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। इस मुद्दे पर विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह पूरे सदन से जुड़ा मामला है।

कई अन्य सदस्य पर इस विषय पर बोलना चाहते थे लेकिन उपसभापति ने उन्हें यह कहते हुए बोलने की इजाजत नहीं दी। कि व्यवस्था के प्रश्न के तहत उठाए गए मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकती। कुरियन ने व्यवस्था देते हुए कहा कि अगर किसी सदस्य को लगता है कि यह विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है तो वह विशेषाधिकार समिति को नोटिस दे सकते हैं।

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