रिसोर्ट मामले में मंत्री की घेराबंदी


रायपुर: शासकीय वन भूमि में रिसोर्ट बनाकर सियासी भंवर में फंसे छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। हालांकि मंत्री के प्रकरण की पूरी रिपोर्ट भाजपा हाईकमान तक पहुंच गई है। अब हाईकमान के निर्णय और संकेतों का इंतजार है। इधर सूत्र दावा करते हैं कि सीएस की रिपोर्ट के बाद राज्य शासन ने वनभूमि की रजिस्ट्री शून्य करने का निर्णय ले लिया है। हालांकि मंत्री ने जरूर चुनौती दी है कि नियम विरुद्ध साबित करने पर वे कार्रवाई के लिए तैयार हैं। उन्होंने किसी भी एजेंसी से जांच कराने की चुनौती दी है। इधर प्रदेश में राजनीतिक उफान के बीच हालांकि मंत्री के पक्ष में अब तक कोई सामने नहीं आया है। प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने जरूर पहले दिन मंत्री को क्लीन चिट दी थी।

इधर मामला दिल्ली तक पहुंचने के बाद खुई मंत्री भी अपना पक्ष रखने गए हैं। वहां दस्तावेजों के साथ वे वस्तुस्थिति से अवगत कराया है। वहीं दूसरी ओर संगठन के वरिष्ठ नेताओं को भी खुद इसकी जानकारी देंगे। हालांकि मंत्री खुद आश्वस्त हैं कि इस मामले में वे निर्दोष ही साबित होंगे। इसके बावजूद विपक्ष ने मंत्री की घेरेबंदी की पूरी तैयारी कर ली है। राज्य विधानसभा का पावस सत्र एक अगस्त से शुरू हो रहा है।

इस मामले में भी मंत्री की घेरेबंदी की पूरी रणनीति तय हो गई है। हालांकि मंत्री ने भी पलटवार के लिए अपनी तैयारी की है। राजनीतिक तौर पर जरूर यह उनके लिए झंझाबातों भरा समय माना जा रहा है। इस मामले के खुलासे के बाद राज्य शासन की ओर से जांच कराई गई।

वहीं जांच रिपोर्ट के तथ्यों को लेकर भी कई तरह के कसायों का दौर शुरू हो गया है। इधर बिहार का राजनीतिक घटनाक्रम सामने आने के बाद जरूर इस मामले की धार कम हुई है। बिहार का मामला सुलझने के बाद अब राष्ट्रीय नेतृत्व कोई विचार कर सकता है।