लाभ के पद मामले में फंसे संसदीय सचिव


रायपुर छत्तीसगढ़ में लाभ के पद के मामले में संसदीय सचिव भी भंवर में फंसते नजर आ रहे हैं। हाईकोर्ट की ओर से संसदीय सचिवों के अधिकारों में अंतरिम रोक लगाने के बाद सियासी गलियारों में अटकलों का दौर तेज हो गया है। वहीं अब हाईकोर्ट में होने वाली अंतिम सुनवाई पर नजरें टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार अगला कदम आगे बढ़ाएगी। राज्य में संसदीय सचिवों को मिल रही सुविधाओं को नियम विरूद्ध होने के दावे किए गए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने संवैधानिक प्रावधानों के विरूद्ध संसदीय सचिवों को मंत्री के समान दर्जे के साथ सुविधाएं प्रदान की है।

इतना ही नहीं बल्कि संसदीय सचिवों को 70 लाख रूपए स्वेच्छानुदान की भ्ीा मंजूरी दी गई है। वहीं राज्य विधानसभा में भी संसदीय सचिव बाकायदा सवालों का जवाब देते हैं। हाईकोर्ट में प्र्रस्तुत याचिका में संसदीय सचिवों को मिल रही सुविधाओं पर ही आपत्ति जताई गई है। वहीं साफ तौर पर कहा गया है कि यह नियम विरूद्ध होने के साथ संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। याचिका में संसदीय सचिवों को पद से हटाकर अपात्र घोषित करने तक की कार्रवाई की मांग की गई है। दरअसल, हाईकोर्ट से पहले राज्यपाल के समक्ष इस मामले में 22 याचिकाएं प्रस्तुत की गई थी।

इनमें 11 संसदीय सचिवों के नाम पर 11 याचिकाओं में उन्हें पद से हटाने और काम पर रोक लगाने की मांग थी। वहीं अन्य 11 याचिकाओं में संसदीय सचिवों को अपात्र करने का उल्लेख किया गया था। राजभवन में इन याचिकाओं पर कोई सुनवाई नहीं होने के बा याचिकाकर्ताओं ने सीधे न्यायालय की शरण ली।

न्यायालय में इस मामले में नए सिरे से सुनवाई का दौर चला। हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से लगातार पैरवी कर रहे महाधिवक्ता की ओर से कोर्ट से समय मांगे जाने के बाद याचिकाकर्ता ने अंतिम फैसले तक संसदीय सचिवों के काम पर रोक लगाने की मांग की थी। इसे स्वीकारते हुए न्यायालय ने पावर सीज करने के आदेश दे दिए।