राहुल ने टटोले आदिवासी बेल्ट के समीकरण, संगठन को किया रिचार्ज


रायपुर: छत्तीसगढ़ के चुनावी मिशन में कांग्रेस ने आदिवासी बेल्ट में नए सिरे से रणनीति तय की है।  कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने खुद बस्तर जाकर वहां संभावनाएं टटोली हैं। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के नेताओं के साथ कार्यकर्ताओं को भी रिचार्ज किया है। संगठन में कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के साथ आगामी चुनाव के लिए अभी से ताकत झोंकने पर भी जोर दिया है। राहुल ने अपने दौरे में एक तरह से संगठन के मुखिया और नेता प्रतिपक्ष को भी क्लीन चिट देते हुए चुनाव के लिए पूरी जवाबदारी सौंपी है।

इधर चर्चाओं के दौरान राहुल ने चुनाव में युवाओं को महत्व देने के भी संकेत दिए हैं। प्रदेश में युवाओं को टिकट देकर नई टीम तैयार करने की रणनीति नजर आ रही है। बस्तर में करीब एक दशक बाद कांग्रेस ने आदिवासियों का भरोसा जीता था। वहीं चुनाव में धमाकेदार वापसी कर 12 में से 8 सीटों पर कब्जा जमाया था। दरअसल, प्रदेश में आदिवासी हमेशा से ही कांग्रेस के लिए परंपरागत ढंग से भरोसेमंद रहे हैं। हालांकि राज्य गठन के बाद पहले चुनाव से जरूर आदिवासी कांग्रेस से छिटककर भाजपा पर भरोसा जताने लगे थे।

इस मामले में कांग्रेस ने बीते चुनाव में रणनीति के तहत काम किया था। इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए। कांग्रेस की इस रणनीति को आगे भी बरकरार रखने की कोशिशें हैं। प्रदेश में आदिवासी बेल्ट के समीकरणों को सत्ता के लिए निर्णायक माना जाता रहा है। राहुल गांधी ने भी इन समीकरणों को भांपते हुए बस्तर के साथ सरगुजा को प्राथमिकता में लिया है।

बस्तर में आदिवासियों का भरोसा जीतने के साथ यूपीए सरकार के वन अधिकार कानून को लेकर भी जंग की शुरूआत हो गई है। राहुल गांधी ने परंपरागत आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए संघर्ष करने राज्य के कांग्रेस नेताओं को भी निर्देशित किया है। इस लिहाज से एक तीर से दो शिकार करने की रणनीति नजर आ रही है। बस्तर के साथ सरगुजा का दांव कांग्रेस के लिए निर्णायक माना जा रहा है।

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