दागी आईएएस जबरिया सेवा से बाहर


रायपुर: केन्द्र सरकार ने दागी अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के मामले में धड़ाधड़ निर्णय लेने शुरू कर दिए हैं। छत्तीसगढ़ में तीन दागी आईपीएस अफसरों को जबरिया रिटायर करने के बाद अब आईएएस अफसरों का सिलसिला शुरू हो गया है। राज्य में सीबीआई के शिकंजें में फंसे आईएएस अफसर बाबूलाल अग्रवाल एवं अजयपाल सिंह को भी केन्द्र सरकार ने जबरिया सेवानिवृत्त कर दिया।

सूत्रों के मुताबिक इस प्रस्ताव पर डीओपीटी ने अपनी मुहर लगा दी है। राज्य सरकार की ओर से दागी अफसरों का रिकार्ड केन्द्र सरकार को भेजा गया था। केन्द्र सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में चार आईएएस अफसर शामिल थे। इनमें दो अफसरों का प्रकरण गंभीर मानते हुए इन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है। इधर आईएएस बीएल अग्रवाल के खिलाफ आय से अधिक बेहिसाब संपत्ति के मामले में पांच साल पहले आयकर विभाग ने शिकंजा कसा था।

इसके बाद इस साल ही सीबीआई ने भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियिम के तहत जांच शुरू की थी। बीएल अग्रवाल ने सीबीआई अफसरों को भी रिश्वत देने की पेशकश कर दी थी। सीबीआई की ओर से गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद से ही वे निलंबित थे। बीएल अग्रवाल के अलावा आईएएस अजयपाल सिंह के खिलाफ भी आर्थिक अनियमितता के कई गंभीर प्रकरण दर्ज हैं।

वहीं सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी से पहले कुछ विभागों में पदस्थापना के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। दोनों अफसर आरोपों से बरी नहीं हो पाए थे। वहीं अजयपाल सिंह भी लंबे समय तक निलंबित रहे हैं।  इसके अलावा वरिष्ठता के बावजूद दागी होने की वजह से समय पर पदोन्नति नहीं मिल पाई थी। करीब दशक भर से वे लूप लाईन में चल रहे थे। बीएल अग्रवाल ने इस मामले में आगे की लड़ाई लडऩे के भी संकेत दिए हैं। माना जा रहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं।

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