किंगफिशर की जाँच के लिए सरकार ने बनाई समिति


नयी दिल्ली : दिवालिया हो चुकी विमान सेवा कंपनी किंगफिशर पर ‘बकाया बढऩे देने’ की जिम्मेदारी तय करने तथा पूरे मामले की जांच के लिए सरकार ने एक समिति बनायी है। सरकार ने परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति पर संसद की स्थायी समिति को बताया कि इस मामले की जांच के लिये भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) में एक आंतरिक समिति का गठन किया गया है जिसकी अध्यक्षता एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गयी है।

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समिति यह जाँच करेगी कि किंगफिशर के पास बकाया बढऩे देने के लिए कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं। साथ ही समिति तंत्र को मजबूत बनाने और प्रक्रिया में सुधार के लिए सुझाव भी देगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनायें दुहराई न जा सकें। समिति को दी गयी जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण के सभी क्षेत्रीय मुख्यालयों और हवाई अड्डों को निर्देश दिये गये हैं कि वे भविष्य में इस तरह के मामले की पुनरावृत्ति रोकने के उपाय करें। आंतरिक समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने इस मामले में आगे कार्रवाई करने का समिति को आश्वासन भी दिया है। संसदीय समिति ने सरकार से कहा है कि वह चाहती है कि “आंतरिक समिति की जाँच में दोषी पाये गये जवाबदेह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।”

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किंगफिशर पर 31 दिसंबर 2016 तक एएआई का 294.69 करोड़ रुपये बकाया था जिसे प्राधिकरण के बही खातों में बट्टे खाते में डाला जा चुका है। इस मामले में हालांकि बकाया वसूली के लिए कानूनी मामला भी दर्ज कराया गया था। अक्टूबर 2012 में नागर विमानन महानिदेशालय ने एयरलाइन का परिचालन लाइसेंस निलंबित कर दिया था। फरवरी 2013 में सरकार ने उसे दिये गये घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय रूटों का आवंटन वापस ले लिया। फरवरी 2014 में कंपनी बंद हो गयी।

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सरकार का कहना है कि कंपनी पर बकाया जमा होते जाने के मुख्य कारण न्यायिक, सेवा कर और रॉयलिटी के मामले हैं तथा सभी मामलों पर सरकार नजर रखे हुये है। संसदीय समिति ने अपनी पिछली रिपोर्ट में कहा था, “सभी कानूनों और प्रक्रियाओं का बड़े पैमाने पर उल्लंघन” कर एएआई ने किंगफिशर पर अपना बकाया इस स्तर तक बढऩे दिया। उसने सरकार को आंतरिक समिति बनाकर मामले की जाँच करने को कहा था।

किंगफिशर एयरलाइन भगोड़ा उद्योगपति विजय माल्या के यूनाइटेड ब्रूअरीज समूह की इकाई थी। किंगफिशर और स्वयं माल्या दिवालिया घोषित किये जा चुके हैं। माल्या फिलहाल देश छोड़कर भागा हुआ है और ब्रिटेन में रह रहा है। उसके ऊपर बैंकों का नौ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है।

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