एएडी ने किया यूजीसी के पत्र का विरोध


पश्चिमी दिल्ली: यूजीसी ने कॉलेजों को आंतरिक वित्तीय स्रोत पैदा करने के लिए पत्र लिखा था, जिससे सातवें वेतन आयोग को लागू किया जा सके। एएडी (एकेडमिक्स फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंंट) ने यूजीसी से इस पत्र को वापस लेने के लिए विरोध किया है। उनका कहना है कि एमएचआरडी और यूजीसी ने फरवरी में इस पत्र को विश्वविद्यालयों को भेजा था। इस पत्र को अब कॉलेजो को भेजना और 30 प्रतिशत अनुदान की राशि काटना निजीकरण, वाणिज्यीकरण और अनुबंधन की तरफ बढ़ता हुआ कदम है। एएडी ने कहा है कि यह कार्यालयी अध्यादेश विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों से अलग करता है।

सरकारी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को 30 प्रतिशत राशि आंतरिक वित्तीय स्रोतों से पैदा करने के लिए बाध्य करती है। यह अनुदान राशि साल दर साल धीरे-धीरे कम होती जाएगी। उन्होंने कहा कि 13 जनवरी का ज्ञापन सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों को वेतन रिवीजन को लागू न करने की मंशा को उजागर करती है। इसमें कहा गया है कि स्वायत्तशासी संस्थानों और सांविधिक निकायों जैसे विश्वविद्यालय, जो केंद्रीय सरकार द्वारा वित्तपोषित और नियंत्रित हैं, इसमें काम करनेवाले कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों जैसे फायदे मिलेंगे।

शिक्षक संगठन ने कहा है कि इस ज्ञापन में स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सुरत में सरकारी समर्थन 70 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि बाकी के 30 प्रतिशत राशि छात्रों के फीस बढ़ोतरी से पूरा की जायेगी। एएडी सार्वजनिक वित्तपोषित उच्च शिक्षण संस्थानों को वाणिज्यीकरण की ओर ले जाने के कदम का पुरजोर विरोध करती है। यह कदम विद्यार्थियों के फीस में भारी बढ़ोतरी करेगा।

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