दिल्ली में एक्टिव है ऑन डिमांड बच्चा चोर गैंग


नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में बच्चा चोरी की धंधा फल-फूल रहा है। हर साल सैकड़ों बच्चे गुम हो जाते हैं। जिनका पता तक नहीं चलता कि वे कहां गए और उनका क्या हुआ? हालांकि, बदलते दौर में बच्चा चोर गिरोह पर नकेल कसने के लिए पुलिस हाईटेक हुई है, मगर बदमाशों ने भी हाईटेक तरीका ढूंढ लिया है। दिल्ली में सक्रिय बच्चा चोर गैंग ऑन डिमांड बच्चा चुराते हैं। जिसके बाद बच्चे की सौदेबाजी ऑनलाइन सोशल साइटों के माध्यम से गुपचुप तरीके से चलती है। ऐसा ही खुलासा चंद रोज पहले जामा मस्जिद पुलिस ने बच्चा चोर गैंग के पकड़े जाने के बाद किया था। अपहरण के बाद गिरोह के लोग बच्चे की खरीद-फरोख्त के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल कर रहे थे।

आईवीएफ सेंटरों के पास फैला गैंग


नि:संतान कपल को बच्चा मुहैया कराने वाला गैंग दिल्ली में चल रहे आईवीएफ सेंटरों के आस-पास सक्रिय हैं। ये गिरोह तीन तरीके से नि:संतान लोगों की सूनी गोद भरते हैं। चोरी का बच्चा बेचकर, एग डोनेट कर और अपनी कोख को उधर देकर, यानी सेरोगेट मदर बनकर। जब जामा मस्जिद से चोरी हुए ढाई साल के बच्चे को जामा मस्जिद एसएचओ अनिल बेरवाल की टीम ने सकुशल बरामद कर तीन महिलाओं समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया तो पता चला कि तीनों महिलाएं एग डॉनर हैं और प्रोफेशनल तरीके से सेरोग्रेसी करती हैं। वह दिल्ली में चल रहे आईवीएफ सेंटरों के आस-पास ही सक्रिय रहती हैं। यहां अक्सर वही लोग आते हैं, जो नि:संतान होते हैं या प्रेगनेंसी में कुछ कॉमप्लिकेशन होती हैं। गिरोह के लोग ऐसे लोगों से संपर्क कर उन्हें एग डोनेट करने से लेकर सेरोगे्रसी के लिए महिला की कोख तक का बंदोबस्त कराते हैं। मगर इसकी बदले में वह मोटी रकम वसूलते हैं।

आईवीएफ सेंटरों पर चौकसी की जरूरत
पुलिस सूत्रों का कहना है कि बच्चा चोर गिरोह की तीन महिलाओं के पकड़े जाने के बाद जिस तरह आईवीएफ सेंटरों के पास इस तरह के लोगों की सक्रियता का पता चला है। वह बेहद चौकाने वाला है। महिलाएं एग डोनेट करने के पांच हजार रुपए तक वसूलती हैं। दो से ढाई लाख रुपए में बच्चा बेचा जाता है। इस तरह के गिरोह पर नकेल कसने के लिए आईवीएफ सेंटरों पर नजर रखने की जरूरत है। पुलिस और सरकार द्वारा आईवीएफ सेंटरों पर चौकसी से ही यह संभव है।

डेढ़ से ढाई साल का बच्चा करते हैं चोरी


पुलिस सूत्रों की माने तो बच्चा चोर गिरोह ऑन डिमांड बच्चा चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं। ताकि ज्यादा दिन बच्चा अपने पास न रखना पड़े। इस तरह के धंधे से जुड़े लोग ज्यादातर डेढ़ से ढाई साल के बच्चे को चुराते हैं। इतनी उम्र के बच्चे इनके लिए सॉफ्ट टारगेट होते हैं। इतने छोटे बच्चे किसी को कुछ बता नहीं सकते। उन्हें रखना ज्यादा मुस्किल भी नहीं होता। दूसरी बड़ी बात नि:संतान कपल भी इसी उम्र के बच्चों की डिमांड करते हैं।

पहले भी पकड़े गए गिरोह
आईवीएफ सेंटरों के पास सक्रिय महिलाओं को जामा मस्जिद पुलिस ने बच्चा चोरी और उसे आगे बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया। इसी तरह के गिरोह को करीब डेढ़ साल पहले भी पुलिस अलीपुर और स्वरूप नगर से गिरफ्तार कर चुकी है। इन मामलों को सुलझाने में तत्कालीन जहांगीरपुरी एसएचओ अनिल बेरवाल की अहम भूमिका रही थी।

भीड़ वाली जगहों पर..
पुलिस सूत्रों की माने तो बच्चा चोर गिरोह रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और अन्य ऐसे सार्वजनिक स्थलों के आस-पास सक्रिय रहते हैं। जहां ज्यादा भीड़ होती है। बच्चा चोर गिरोह में पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी शामिल हैं, जो मौका मिलते ही बच्चा चुराकर फरार हो जाती हैं।

मिलकर दे सकते हैं मुंह तोड़ जवाब:  मधुर वर्मा


डीसीपी क्राइम एवं दिल्ली पुलिस प्रवक्ता मधुर वर्मा ने बताया कि मासूम बच्चे बदमाशों के लिए सॉफ्ट टारगेट होते हैं। जिस किसी का बच्चा गुम होता है वह ता उम्र उसके लिए तरसते हैं। गिरोह के लोग भीड़-भाड़ वाली जगहों पर सक्रिय रहते हैं। पुलिस तो सतर्क है, मगर आम लोग पुलिस के साथ मिलकर बच्चा चोर गिरोह को मुंह तोड़ जवाब दे सकते हैं। लोग पुलिस की आंख-कान बनें और तुरंत पुलिस को सूचना दे। मधुर वर्मा ने अभिभावकों से भी अपील करते हुए कहा है कि वे भी बच्चों को ध्यान रखें। कहीं भीड़-भाड़ वाली जगह जैसे रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, बाजार या अन्य जगह होते हैं, तो बच्चों को साथ रखें।

– वसीम सैफी

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