एडहॉक टीचर्स के इंटरव्यू रद्द, हड़कंप,


पश्चिमी दिल्ली: डीयू के राजनीतिक विज्ञान विभाग में होने वाले इंटरव्यू को रद्द कर दिया गया है। यहां एडहॉक टीचर्स पोस्ट पर इंटरव्यू होने थे। इन इंटरव्यू को डूटा, एसी और ईसी सदस्यों के विरोध के चलते रद्द करना पड़ा। इस दौरान डीयू एसी के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन, ईसी मेंबर डॉ. राजेश झा, डॉ. अजय कुमार भागी और डूटा सचिव डॉ. संदीप कुमार मौजूद रहे। गौरतलब है कि राजनीतिक विज्ञान विभाग हर वर्ष एडहॉक टीचर्स का इंटरव्यू करता है। यहां मंगलवार सुबह भी 80 से अधिक एडहॉक टीचर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। वहीं, ईसी, एसी और डूटा पदाधिकारियों को जब इसकी सूचना मिली तो वह तुरंत विभाग में पहुंचे और विभागाध्यक्ष से एडहॉक टीचर्स के पुनर्नियुक्ति की मांग करने लगे।

इन पदाधिकारियों ने कहा कि एडहॉक टीचर्स को यूनिवर्सिटी खुलने से पहले ज्वॉइनिंग कराया जाए लेकिन डिपार्टमेंट के टीचर्स नहीं माने। इसके बाद में विभागाध्यक्ष के साथ टीचर्स और एसी/ईसी सदस्यों की मीटिंग हुई। दो घंटे तक चली मीटिंग के बाद इंटरव्यू को कैंसिल करना पड़ा। इन पदाधिकारियों ने इसे टीचर्स यूनिटी की जीत बताया। उन्होंने कहा कि इससे दूसरे विभागों में भी यह संदेश जाएगा। विभाग अगर अपने यहां दोबारा एडहॉक टीचर्स का इंटरव्यू करायेगा तो हम इसका जबरदस्त विरोध करेंगे और इंटरव्यू नहीं होने देंगे। प्रो. हंसराज सुमन ने बताया राजनीतिक विज्ञान विभाग में सामान्य पद-7, ओबीसी-3, एससी-2, एसटी-2 पदों के अलावा 17 गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति की जानी थी। ये टीचर्स जबकि पहले से ही डिपार्टमेंट में काम कर रहे हैं।

इसके बावजूद विभाग फि र से इंटरव्यू कराकर कुछ टीचर्स को बाहर करना चाहता है। ये लोग लंबे समय से यहां पढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ कॉलेज और डिपार्टमेंट हर साल जानबूझकर एडहॉक टीचर्स को रिप्लेस करके अपनों को लगाना चाहते हैं। नियम यह है कि एक एडहॉक टीचर को हटाकर दूसरे को नहीं लगाया जा सकता है, जब तक उस टीचर को कोई शिकायत नहीं है। पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में कई सालों से पढ़ा रहे इन टीचर्स को कोई शिकायत नहीं है, फि र भी हरासमेंट करने के लिए इंटरव्यू लिया जा रहा है। प्रो. सुमन ने बताया होना यह चाहिए कि विभाग में स्थायी नियुक्ति के लिए इंटरव्यू का प्रोसेस शुरू कराया जाए, जिससे इन एडहॉक टीचर्स की स्थायी नियुक्तियां की जा सके। डीयू के कॉलेजों में आज 60 फीसदी और डिपार्टमेंट में 50 फीसदी टीचर्स की वैकेंसी हैं, जिसे 10 वर्षों से भरा नहीं गया। कॉलेजों से हर महीने 20 से 30 टीचर्स सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनकी जगह एडहॉक ही लगाए जा रहे हैं।

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