स्कूल के आगे जलभराव से छात्र-छात्राएं मुश्किल में


दक्षिणी दिल्ली: मोलड़बंद स्कूल के आगे हर बार बारिश के मौसम में घुटनों तक गंदा पानी भर जाती है जिस कारण इसी रास्ते से स्कूल आने जाने वाले छात्र-छात्राएं बेहद परेशान हैं। हालात ऐसी है कि खासकर मानसून में स्कूल रोड एक प्रकार से तालाब में तब्दील हो जाती है। सड़क पर अधिकांश समय जलभराव की समस्या होने से छात्र-छात्राओं को प्रति दिन स्कूल आने-जाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। मानसून के समय यह समस्या काफी गंभीर हो जाती है। अभिभावकों का कहना है कि बड़ी संख्या में लड़कियां जैसे-तैसे दीवारा का सहारा लेकर वह स्कूल आती-जाती हैं। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, दीवार के सहारे स्कूल जाने के समय वह कई बार गिर कर चोटिल हो जाते हैं जिस कारण वह स्कूल जाने की वजाय घर लौटने में भला समझते हैं। यह समस्या कोई नई नहीं है। बता दें कि मोलड़बंद स्थित राजकीय सर्वोदय विद्यालय दक्षिणी दिल्ली का सबसे बड़ा स्कूल है।

यहां पांच स्कूलों में दोनों पालियों में तकरीबन 35 हजार छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। बावजूद इतनी बड़ी समस्याओं को कभी गंभीरता से नहीं लिया गया। आज उसी का परिणाम है कि स्कूल तक पहुंचने में बच्चों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। अभिभावक भी इन समस्याओं के आगे कई बार बेहद परेशान हो जाते हैं कि आखिर बच्चों को कैसे स्कूल पहुंचाएं। आरोप है कि हर बार मानसून आने से पूर्व पीडब्ल्यूडी, बाढ़ नियंत्रण विभाग दिल्ली सरकार व नगर निगम अपने अधीन आने वाले नालियों के जलभराव से निपटने की पूरी तैयारी का दावा करते हैं किन्तु हकीकत कुछ और ही होती है। कॉलोनियों में पार्षद जहां सफाई कर्मचारियों का रोना रो रहे हैं तो वहीं दिल्ली सरकार के विभिन्न सिविक एजेंसियों के हालात भी कुछ ऐसे ही हैं।

केवल घोषणाएं करने से काम खत्म नहीं हो जाता है। स्थिति से निपटने के लिए अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ बढऩा चाहिए। राजकीय सर्वोदय कन्या माध्यमिक विद्यालय नम्बर-2 की प्राचार्या सुदेश कुमारी का कहना है कि स्कूल प्रशासन सड़क पर जलभराव समस्या से निपटने के वास्ते कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों से निदान के वास्ते बैठकें कर अपील कर चुके हैं। साथ ही संबंधित विभाग को भी पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी हुई है। पंप के बदले ठोस समाधान की जरूरत है। बाढ़ नियंत्रण अधिकारी ने बताया कि हां समस्या है इसके वास्ते जलभराव से निपटने के लिए वहां दो पपिंग सैट लगा दिए गए हैं। सड़क का ढलान नीचे है इन समस्याओं के निपटने के लिए सड़क और नालियों का लेवल ऊंचा करना होगा।

– संजीव झा