एक ऑटो चालक, जो सीखा रहा है स्वच्छता का पाठ खास अंदाज में


दिल्ली-एनसीआर में ऑटोरिक्शा चलाने वाले सचिन शर्मा अपने ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगाकर एक खास अंदाज में लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ा रहे हैं। उमस भरी गर्मी के बीच दोपहर के करीब तीन बजे नोएडा सिटी सेंटर मेट्रो स्टेशन के पास एक दूसरा ऑटो वाला उनके ऑटो के पीछे लगे कूड़ेदान में गुटखा थूकता है और आगे बढ़ जाता है लेकिन इस पर ध्यान दिए बिना सचिन सवारी को लेकर निकल पड़ते हैं।

सचिन की पहचान हुई ‘कूड़ेदान वाले ऑटो’ के रूप में
ग्रेटर नोएडा में रहने वाले और चार बच्चों के पिता सचिन डेढ़ साल से ऑटो चला रहे हैं और उन्होंने इस वर्ष जनवरी में ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगाया। उन्होंने अपने ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगा रखा है जिसमें राह चलते लोग कूड़ा फेंकते हैं और जब कूड़ेदान भर जाता है तो सचिन उसे रास्ते में किसी ढलावघर में जाकर फेंक देते हैं। अपने इस अनोखे काम को लेकर सचिन की पहचान ‘कूड़ेदान वाले ऑटो’ के रूप में हो गई है।

अपने पिता की बीमारी ने सिखाया सफाई का पाठ
ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगाने के आइडिया के बारे में सचिन बताते हैं कि उनके बच्चों को आए दिन खांसी जुकाम होता रहता था, डॉक्टर के पास जाने पर उन्होंने बताया कि यह गंदगी के कारण होता है। यहीं से सचिन के मन में स्वच्छता को लेकर जागरूकता पैदा हुई।

एक और वाकया याद करते हुए वह बताते हैं कि एक बार वह अक्षरधाम के पास से गुजर रहे थे तो एक कार में बैठे व्यक्ति ने कॉल्डड्रिंक की बोतल बाहर फेंक दी जिससे उनकी गाड़ी अनियंत्रित हो गई। सचिन ने बताया कि इन्हीं घटनाओं से उन्हें ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगाने का विचार आया। सचिन ने अपने ऑटो में मयूर जग भी रखा हुआ है और वह कूड़ेदान को खाली करने के बाद उसे पानी से धो देते हैं ताकि उसमें से बदबू ना आए।

सचिन ने कहा, “वैसे तो हर जगह कूड़ेदान होना चाहिए लेकिन मेरा संदेश है कि अगर कोई कूड़ा फेंके तो इसमें कूड़ा डाले। मैं इसे ले जाकर कूड़ेदान में डाल देता हूं। कई लोग मुझे पागल कहते हैं लेकिन मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। मैंने देशहित में यह काम शुरू किया।” सचिन के लिए लोगों का संदेश है “दिमाग की गंदगी निकालो और स्वच्छता अपनाओ।” उन्होंने बताया कि यह इसलिए नहीं है कि जब घर से निकलू तो पड़ोसी अपने घरों का कूड़ा इसमें डाल दें बल्कि यह तो उनकी सोच बदलने के लिए है। ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजधानी के नगर निगमों ने सरकार की स्वच्छता रैंकिंग में खराब प्रदर्शन किया है तो अगर सचिन के इस अनूठे विचार को अपनाया जाए तो कुछ बदलाव लाया जा सकता है।

सचिन बताते हैं कि एक बार वह सवारी को लेकर इंडिया गेट गए तो वहां खड़े बाकी ऑटो वालों ने इस पर नाराजगी जताई। उन लोगों ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार को यह दिख जाएगा तो कहीं वह ऑटो के पीछे कूड़ेदान लगाना अनिवार्य ना कर दें। सचिन अपने बिंदास अंदाज से लोगों को स्वच्छता का पाठ पढ़ाने से नहीं चूकते। हंसते हुए वह बताते हैं कि अगर कोई रास्ते में कहीं किसी ठेले पर कुछ खा रहा होता है तो वह अक्सर जानबूझकर उसके सामने ऑटो रोक देते हैं।

वह बताते हैं कि कई बार उनके ऑटो को देखकर लोग शर्म के मारे कूड़ा सड़कों पर नहीं फेंकते। वह बताते हैं कि वह उस ठेले वाले के पास खाना नहीं खाते जिसके पास कूड़ेदान नहीं होता और इतना ही नहीं बल्कि वह उसे बोलते भी है, “मैं यहां इसलिए नहीं खा रहा क्योंकि यहां कूड़ेदान नहीं है।” सचिन अपने ऑटो में बैठने वाली सवारियों को भी पहले ही बता देते हैं कि वह सड़क पर कूड़ा ना फेंके बल्कि पीछे लगे कूड़ेदान में ही फेंके।

एक किस्सा याद करते हुए वह बताते हैं कि एक बार मुंबई की एक सवारी बैठी तो उनकी बच्ची ने चिप्स खाया तो उसकी मम्मी ने बोला कि पैकेट बैग में ही रख लो यहां कूड़ेदान नहीं है लेकिन सचिन ने उनसे कहा कि पीछे कूड़ेदान लगा है आप उसमें फेंक दीजिए तो यह सुनकर वह महिला काफी खुश हुई और उसने सचिन की तारीफ भी की। सचिन चाहते हैं कि उनका यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचे ताकि लोगों में सड़कों पर गंदगी ना फैलाने को लेकर जागरूकता आए।

सचिन ने कहा, “मोदी जी ने एक बार झाडू उठाई तो लोगों ने भी झाडू उठाई और उनमें जागरूकता आई। इसी तरह अगर मोदी जी एक बार मेरे ऑटो को दिखा दें तो लोगों में और भी जागरूकता आएगी।” दिल्ली में एक व्यक्ति को पेशाब करने से रोकने पर ई-रिक्शा चालक की हत्या करने की घटना का जिक्र करते हुए सचिन कहते हैं कि वह लोगों से जबरदस्ती कुछ करने के लिए तो नहीं कह सकते है बल्कि इस कूड़ेदान को देखकर उनमें खुद ही जागरूकता आनी चाहिए।

सचिन ने अपने ऑटो के पीछे महिलाओं और बेटियों के सम्मान में कई संदेश भी लिखवाए हुए हैं। वह रात को 12 बजे से सुबह चार बजे तक जरूरतमंद लोगों के लिए फ्री ऑटो सेवा भी देते हैं। इस पहल के लिए नोएडा अथॉरिटी ने उन्हें ईनाम देने की बात कही थी लेकिन अभी तक उन्हें इनाम नहीं मिला है।

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