स्कूल के आसपास अब नहीं होंगे ठेके


नई दिल्ली: राजधानी में स्कूलों के आसपास आने वाले दिनों में शराब के ठेके नजर नहीं आएंगे। दिल्ली सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर इन सभी ठेकों को अन्य जगहों पर शिफ्ट करने या बंद करने का निर्णय लिया है। स्कूल, धार्मिक स्थल या अन्य जगहों के 100 से 200 मीटर के दायरे में नया ठेका नहीं खोला जा सकता। लेकिन स्कूल, धार्मिक स्थल व अन्य के बनने से पहले ठेका वहां मौजूद रहा होगा तो उसे बंद भी नहीं किया जा सकता।

सरकार ने इस नियम में बदलाव की तैयारी कर रही है। इस संबंध में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली में स्कूलों के आसपास माहौल खराब कर रही शराब दुकानों की जानकारी सभी स्कूलों से मांगी है। नियमबद्ध होने के बावजूद अगर कोई शराब की दुकान किसी स्कूल के आसपास माहौल खराब कर रही है तो उसे बंद किया जाएगा। वहीं इस संबंध में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दिल्ली में 1500 से अधिक शराब की दुकानें हैं।

इनमें एल 6 लाइसेंस धारक शराब के ठेके को लेकर लगातार शिकायतें आती रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में सभी की जांच की जाएगी। देखा जाएगा कि इन दुकानों के माध्यम से लोगों को कोई समस्या तो नहीं, विशेषकर स्कूलों के आसपास। इससे पहले भी आसपास के माहौल को सुरक्षित बनाने के लिए विभाग ने सभी दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया था। उन्होंने बताया कि सरकार बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और जरूरत के आधार पर और सख्त नियम बनाए जा रहे हैं।

सरकार के पास आ चुकी है शिकायत…
स्कूल के पास शराब की दुकानों से हो रही समस्या को लेकर आबकारी विभाग के पास कई शिकायतें आ चुकी हैं। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपडग़ंज के मयूर विहार फेस-1 में निजी स्कूल के पास ही शराब का ठेका है। इस ठेके को लेकर स्थानीय लोगों ने शिकायत की थी कि इसके कारण बच्चों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा विभाग के पास रोहिणी स्थित केंद्रीय विद्यालय, कौटिल्य सर्वोदय बाल विद्यालय चिराग एंक्लेव में शिक्षण संस्थानों के पास ठेके को लेकर स्थानीय लोगों की शिकायतें आ चुकी हैं। इस संबंध में स्थानीय लोगों का कहना है कि इन ठेकों के आसपास रहने वाले असामाजिक तत्वों से बच्चों की सुरक्षा को खतरा है।

शुरू की थी नीति…
दिल्ली में ठेकों को बंद करने या उन्हें शिफ्ट करने के लिए मोहल्ला सभाएं करने की नीति बनाई थीं। इस नीति के तहत यदि स्थानीय लोग मोहल्ला सभाकर उक्त ठेके को हटाने का प्रस्ताव पास करते हैं तो आबकारी विभाग को उस ठेके को शिफ्ट या बंद करना पड़ता था। इस नीति के तहत संजीव झा, कपिल मिश्रा सहित कुछ अन्य विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्र में ठेकों को बंद या शिफ्ट भी करवाया था। पिछले काफी समय से इस दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है।

अभिभावक भी होते हैं परेशान…
ठेकों के कारण स्कूली बच्चे ही नहीं अभिभावक भी परेशान होते हैं। कोटला मुबारकपुर के स्थानीय लोगों का कहना है कि बस स्टाप के पास ही ठेका है। इस ठेेके के आसपास असामाजिक तत्व घूमते रहते हैं। यह सुबह शाम आने जाने वाले महिलाओं को परेशान करते हैं। उनका कहना है कि इसी प्वॉइंट पर अधिकतर स्कूलों की बसें भी रुकती हैं। सरकार को ऐसे ठेकों पर भी नकेल कसनी चाहिए।

– राकेश शर्मा

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