बोतल से फोड़ा युवक का सिर


दक्षिणी दिल्ली: राजधानी के पॉश इलाकों में बने नामी होटल्स और क्लब में जाने वालों की सुरक्षा राम भरोसे है। यू तो सुरक्षा के नाम पर होटलों और क्लबों में सुरक्षा गार्ड और बाउंसर तैनात रहते हैं, लेकिन किसी अप्रिय घटना के वक्त उनका वहां होना न होना बराबर ही साबित हो रहा है। इससे साफ है कि वे महज दिखावे के लिए होते हैं और यदि किसी पर कोई हमला करता है तो उनका उससे कोई सरोकार नहीं है। हाल ही में दक्षिणी दिल्ली के भीकाजी कामा प्लेस में हयात रिजेंसी होटल स्थित ‘हाउस ए क्लब’ में मामूली सी कहासुनी पर एक युवक के सिर पर बोतल मारकर उसे घायल कर दिया गया। हैरानी की बात यह रही कि पूरी वारदात किसी सुनसान जगह नहीं, बल्कि क्लब के अंदर की है। इसके बावजूद झगड़े के दौरान कोई उनका बीच-बचाव कराने के लिए आगे नहीं आया। ऐसे में क्लब में मनोरंजन के लिए जाने वाले युवक-युवतियों की सुरक्षा से किसी का कोई लेना-देना नहीं है, जबकि सभी मोटा जेबखर्च कर वहां जाते हैं।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में सुबह करीब चार-पांच बजे किसी बात को लेकर दो पक्षों के तीन युवकों के बीच कहासुनी हो गई। पहले उनके बीच जोरदार बहस हुई और कुछ ही देर में एक युवक ने दूसरे युवक के सिर पर बोतल दे मारी। बोतल लगने पर युवक खून से लथपथ हो गया। वारदात के बाद पीसीआर कॉल होने पर पुलिस मौके पर पहुंची तब तक पीडि़त युवक उपचार के लिए एक निजी अस्पताल जा चुका था। इसके बाद पुलिस बोतल से हमला करने वाले और उसके साथी युवक को मेडिकल जांच के लिए ले गई। दोनों का सफदरजंग अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। सूत्रों के मुताबिक मेडिकल जांच में दोनों पक्ष के तीनों ही युवकों द्वारा शराब पीने की पुष्टि हो गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और घायल युवक ने पुलिस कार्रवाई न करने की इच्छा जाहिर की।

हालांकि, पुलिस ने वारदात के दौरान क्लब में लगी सीसीटीवी फुटेज भी खंगाली, जिनमें ये युवक पहले बहस करते और बाद में बोतल से हमला करने वाला युवक भी दिखाई दिया। इस वारदात से एक बात साफ हो गई कि बेशक ‘हाउस ए क्लब’ में हुई मारपीट में किसी भी पक्ष के युवक को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन सिर की चोट गंभीर होने पर किसी की जान भी जा सकती थी। इससे सवाल खड़ा होता है कि क्लब में तैनात सुरक्षा गार्ड, बाउंसर या दूसरे कर्मचारी आखिर क्या कर रहे थे। क्लब के भीतरी हिस्से में वारदात होने के बावजूद बीच-बचाव क्यों नहीं कराया गया। सूत्रों की मानें तो युवकों के बीच बहस शुरू होने के वक्त ही मामले को शांत कराया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे क्लब में जाने वालों की सुरक्षा को लेकर सवालिया निशान लग गया है।

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