डीडीयू: इलाज के बजाय फेंका बाहर


पश्चिमी दिल्ली: सरकार चाहे अस्पतालों के बेहतर होने के लाख वादे कर ले लेकिन उनके अपने अधिकारी ही उनके वादों को कहीं न कहीं पलीता लगा देते हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है पश्चिमी दिल्ली के सबसे बड़े अस्पताल कहे जाने वाले दीनदयाल उपाध्याय में जहां एक व्यक्ति को ईलाज देने के बजाय अस्पताल प्रशासन ने बाहर फेंक दिया। दरअसल मामला यह था कि डीडीयू के मेन गेट के पास यह व्यक्ति बेहोशी की हालत में पड़ा था। उसके पैर से खून बह रहा था जिसे पास की पुलिस चौकी के पुलिसकर्मियों ने उठाकर अस्पताल में भर्ती करवा दिया लेकिन कुछ देर बाद ही उस व्यक्ति को वापिस अस्पताल के बाहर रख दिया। अस्पताल की रोगी कल्याण समिति के पूर्व मेंबर दिनेश जैन का कहना है कि जब अस्पताल के डॉक्टरों से यह पूछा गया कि इस व्यक्ति को बाहर क्यों कर दिया गया तो डॉक्टरों ने जवाब दिया कि वह खुद गया है।

जबकि उसका पांव खून से लतपथ पड़ा है। इसके बाद व्यक्ति की एमएलसी करवाई गई जिसमें उसकी पहचान सरजीत के रूप में हुई है। जैन ने बताया कि इससे पहले भी कई मरीजों के साथ ऐसा किया जा चुका है। न तो अस्पताल प्रशासन इस ओर कोई ध्यान देता है और न ही सरकार ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कोई कदम उठाती है। जैन ने बताया कि अस्पताल के बाहर पड़े मरीज को दोबारा भर्ती करवाया गया है लेकिन डॉक्टर उसका ईलाज करेंगे या नहीं इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं। जब इस मामले पर बात करने के लिए अस्पताल के एमएस से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाकर जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। उनसे जानकारी लेने के लिए उन्हें मैसेज भी किया गया लेकिन फिर भी कोई जवाब नहीं आया।

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