शिक्षा विभाग ने की कार्रवाई


पश्चिमी दिल्ली: नॉर्थ एमसीडी के शिक्षा विभाग ने बाल विभाग की शिकायत पर गंभीरता से कार्रवाई की है। निगम की इस कार्रवाई से सपष्ट हो गया है कि शिक्षा को लेकर निगम बेहद गंभीर है और इसमें किसी भी तरह की कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। पूरा मामला नॉर्थ एमसीडी के सिविल जोन का है। यहां पर काम में कोताही बरते जाने के मामले में शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए शिक्षक का ट्रांसफर कर दिया है। इस कार्यवाही के तहत सिविल लाइन जोन के जंहागीरपुरी एच- ब्लॉक स्कूल के एक अध्यापक का सिविल लाइन जोन से सदर-पहाड़ जोन में इंटरजोनल ट्रांसफर कर दिया गया है। यह कार्यवाही दिल्ली बाल अधिकार और संरक्षण आयोग को की गई शिकायत की जांच करने के बाद की गई है।

जानकारी के मुताबिक सिविल लाइन जोन के जंहागीरपुरी एच-ब्लॉक स्कूल की प्रधानाचार्या समेत पूरे स्टाफ की शिकायत दिल्ली बाल अधिकार और संरक्षण आयोग में की गई। इसमें शिकायतकर्ता का नाम नीरज कुमार था। इस शिकायत में बच्चों से सफाई करवाना, प्रधनाचार्या व शिक्षिकाओं के समय पर न आने जैसी कई गंभीर आरोप लगाए थे और प्रधनाचार्या के रसूख के कारण उस पर विभाग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है। इस विषय पर दिल्ली बाल अधिकार और संरक्षण आयोग ने विभाग से कार्यवाही कर आयोग में रिपोर्ट भेजने को कहा। इस विषय पर सिविल लाइन जोन के अधिकारियों की जांच कमेटी बनाई। जब जांच अधिकारी शिकायतकर्ता नीरज कुमार के घर पहुंचे तो शिकायतकर्ता ने लिखित में लिखकर दिया कि उसके पते का दुरुपयोग किया गया है तथा उसके द्वारा कोई शिकायत ही नहींं की गई है।

इसके बाद स्कूल इंस्पेक्टरों द्वारा जांच से सामने आया कि स्कूल के एक शिक्षक ने ही अपने प्रधनाचार्या व शिक्षिकाओं की शिकायत की है। जांच के दौरान प्रधानाचार्या व शिक्षिकाओं ने लिखित में दिया कि यह शिक्षक यूनियन से जुड़े होने की धमकी देता है और स्कूल प्रशासन के कार्याें में बाधा उत्पन्न करता है। शिक्षिकाओं के अनुसार जो झाडू लगाती तस्वीर दिल्ली बाल अधिकार और संरक्षण आयोग को भेजी गई वह इसी शिक्षक नेता की है। दूसरी तरफ आरोपित शिक्षक नेता ने अन्य शिक्षिकाओं पर ही छात्रों को न पढ़ाने जैसे कई गंभीर आरोप लगा दिए। इस बेहद गंभीर प्रकरण को शिक्षा निदेशक ने बेहद गंभीरता से लिया और संबंधित शिक्षक का इंटरजोनल ट्रांसफर कर दिया है।

सूत्रों के अनुसार संबंधित शिक्षक ने कई निगम नेताओं से अधिकारियों पर कार्यवाही न करने का दवाब बनाने की कोशिश की। इसके अलावा संबंधित शिक्षक के खिलाफ निगम की छवि धूमिल करने और विभाग के प्रति संदिग्ध निष्ठा रखने के लिए कार्यवाही के लिए अतिरिक्त आयुक्त के पास फाइल भेजी जा चुकी है। इस शर्मनाक प्रकरण से निगम के स्कूलों में चल रही राजनीति सामने आ गई है जिसके कारण निगम के स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

– राजेश रंजन सिंह

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