गड़बड़झाला एमबीबीएस एडमिशन


नई दिल्ली: नीट द्वारा आयोजित पीजी परीक्षा को लेकर तो पहले ही विवाद चल रहा था, लेकिन अब एमबीबीएस पर भी इसका साया मंडराने लगा है। एक छात्र कई राज्यों का डोमिसाइल सर्टिफिकेट बनवाकर नामांकन करवा रहे हैं। इसकी वजह से अच्छी रैंकिंग वाले छात्रों को भी दाखिला नहीं मिल रहा है। इसे लेकर कुछ राज्यों ने अपने यहां दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगा दी है और डोमिसाइल की जांच शुरू कर दी है। अब दिल्ली में भी ऐसी ही मांग उठने लगी है।

नीट द्वारा आयोजित एमबीबीएस परीक्षा 2017 में शामिल हुए सक्षम भाटिया बताते हैं कि इस परीक्षा में उनका ऑल इंडिया रैंकिंग 7700 आई थी, जबकि सामान्य वर्ग में रैंकिंग 4415 थी। इसके बाद भी उन्हें दिल्ली के किसी भी मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह है कि छात्रों ने एक नहीं, बल्कि कई राज्यों के डोमिसाइल बनवाकर विभिन्न राज्यों में आवेदन कर दिया। बता दें कि इस वर्ष पहली बार एमबीबीएस के लिए सभी राज्यों की साझा प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें छात्रों की दो तरह से रैंकिंग निर्धारित होती है। पहली ऑल इंडिया स्तर पर और दूसरी राज्य स्तर पर। राज्य स्तर पर रैंकिंग निर्धारित करते समय उसमें से आरक्षित वर्ग को बाहर निकाल कर सामान्य वर्ग को ही शामिल किया जाता है। नियमों के अनुसार, राज्य अपनी सामान्य वर्ग  की 85 प्रतिशत सीटों पर राज्य के वाले छात्रों को ही दाखिला देंगे।

क्या है मामला…
अपने ही राज्य के छात्रों को दाखिला देने के नियम हर राज्य ने अपने अनुसार, बनाए हुए हैं। इसका फायदा उठाकर छात्र कई राज्यों का डोमिसाइल बनवाकर एक से अधिक राज्यों में आवेदन कर देते हैं। इसे देखते हुए कई राज्यों ने दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए डोमिसाइल की जांच करनी शुरू कर दी है। ऐसी ही मांग दिल्ली में भी उठनी शुरू हो गई है। इस बाबत डीजीएचएस से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

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