पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन 21 साल पुराने मामले में बरी


नयी दिल्ली  : पूर्व केंद्रीय मंत्री पीके थुंगन को आय से अधिक संपत्ति रखने के एक मामले में एक विशेष अदालत ने आज बरी कर दिया और कहा कि सीबीआई अपने मामले को साबित करने में नाकाम रही। वह इस मामले में 21 साल से मुकदमे का सामना कर रहे थे। विशेष सीबीआई न्यायाधीश पीतांबर दत्त ने पूर्व शहरी एवं रोजगार मामलों के राज्य मंत्री थुंगन को बरी करते हुए कहा कि अभियोजन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उनके खिलाफ अपराध साबित करने में सफल लहीं रहा। थुंगन 29 साल की उम, में 1975 में सबसे युवा मुख्यमंत्री बने थे। वह अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उन पर केंद, की पीवी नरसिम्हा राव नीत सरकार के तहत जून 1991 और
अप्रैल 1996 के बीच अपनी आय के ज्ञात स्रोत से अधिक 1,08,16,532 रूपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप था। न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा है कि पीके थुंगन के पास 1,08,16,532 रूपये की संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्रोत से अधिक थी जिसके लिए संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

अदालत ने 156 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि उक्त अवधि के दौरान हासिल की गई संपत्ति, थुंगन के पास पाई गई कुल संपत्ति से घटाने पर 1. 07 लाख रूपये ही अधिक थी। मुकदमे के दौरान थुंगन ने कहा कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। थुंगन की ओर से पेश अधिवक्ता हर्ष शर्मा और वैभवी शर्मा ने दलील दी कि अभियोजन उनके खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा है। साथ ही, सीबीआई द्वारा पेश की गई चीजों से खुद जाहिर हुआ कि थुंगन की आय आरोपपत्र में दिखाई गई राशि से कहीं अधिक थी। वकीलों ने कहा कि थुंगन के पास बागवानी और कृषि तथा डेयरी कारोबार से पर्याप्त आय थी जिस पर विचार नहीं किया गया। थुंगन के खिलाफ आवास घोटाला मामले की जांच के दौरान सीबीआई ने उनके दिल्ली और अरूणाचल प्रदेश स्थित आवासी परिसरों में तलाशी ली थी और संदिग्ध दस्तावेज पाए थे। यह आरोप लगाया गया कि इससे जाहिर होता है कि जून 1991 से 1996 के बीच उन्होंने काफी मात्रा में संपत्ति अर्जित की।

(भाषा)