उच्च न्यायालय विज्ञापन संबंधी समिति की रिपोर्ट की वैधता पर विचार करेगा


नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय केंद, द्वारा नियुक्त एक समिति की उस रिपोर्ट की वैधता पर विचार करने पर आज सहमत हो गया जिसमें सिफारिश की गयी है कि आम आदमी पार्टी (आप) से 97 करोड़ रूपए वसूल किए जाएं जो दिल्ली सरकार ने विज्ञापन पर खर्च किए थे। न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने केंद्र, दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल और कांग्रेस नेता अजय माकन को नोटिस जारी कर आप की याचिका पर उनसे जवाब मांगा। याचिका में आप ने सरकारी विज्ञापनों के नियमन के लिए स्थापित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट को चुनौती दी है।
अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए आठ अगस्त की तारीख तय की है। इस रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने पार्टी से 42 करोड़ रूपए वसूल करने का आदेश दिया था। दिल्ली सरकार ने विज्ञापनों के लिए इतनी राशि का भुगतान किया था। उपराज्यपाल ने यह भी निर्देश दिया था कि 55 करोड़ रूपए की राशि जो विज्ञापन एजेंसियों को दी जानी थी, का भुगतान सरकार नहीं बल्कि पार्टी करे। पार्टी ने उपराज्यपाल अनिल बैजल के आदेश, मांग नोटिस और समिति की सिफारिशों को चुनौती देते हुए कहा कि उनका पक्ष सुने बिना ये फैसले किए गए।

अदालत ने कहा कि नोटिस के पालन नहीं किए जाने का अभी कोई कानूनी नतीजा नहीं होगा इसलिए पार्टी मांगी गयी राशि का भुगतान करने से बच सकती है। अदालत ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार या उपराज्यपाल राशि वसूलने के लिए कोई कार्रवाई करते हैं तो पार्टी अपना बचाव कर सकती है। अदालत ने आप से अपना आवेदन वापस लेने को कहा जिसमें मांग नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की गयी थी। इस पर पार्टी ने अपना आवेदन वापस ले लिया। अपनी याचिका में, आप ने उपराज्यपाल के निर्देश पर दिल्ली सरकार के सूचना एवं प्रचार विभाग द्वारा 30 मार्च को जारी मांग नोटिस रद्द करने का अनुरोध किया है। उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को एक महीने के अंदर आप से राशि वसूलने का आदेश दिया था। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त बी बी टंडन की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दिल्ली सरकार ने उच्चतम न्यायालय के 13 मई 2015 के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए सरकारी खजाने की राशि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और उनकी पार्टी के प्रचार के लिए खर्च की थी।

(भाषा)

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