कैसे बनें डॉक्टर, जब नहीं मिलेंगे गुरुजी


पूर्वी दिल्ली: बिन गुरु ज्ञान नहीं। किसी भी विद्या के लिए सबसे ज्यादा जरूरी होता है कि उसे सिखाने वाला गुरु बेहतर हो लेकिन यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस (यूसीएमएस) में तो गुरुजी ही नहीं हैं। पिछले डेढ़ साल से यहां प्रोफेसरों के 83 पद खाली पड़े हैं। यहां छात्रों को पढ़ाने वाला कोई नहीं मिल रहा है। जानकारी के अनुसार कॉलेज में प्रोफेसरों के कुल 192 पद हैं। इसके अलावा सीनियर रेजिडेंट के 117 और जूनियर रेजिडेंट के 450 पद हैं। इनमें से प्रोफेसरों के 83 पद खाली पड़े हुए हैं। इसके लिए कॉलेज ने 24 मई 2016 को वैकेंसी भी निकाली थी। जिसके बाद इन पदों के लिए करीब साढ़े छह सौ आवेदन आए। कॉलेज ने इनकी स्क्रीनिंग की और इंटरव्यू के लिए करीब पांच सौ प्रोफेसरों की सूची तैयार की। लेकिन इस सूची को दिल्ली विश्वविद्यालय ने नकार दिया।

नाम न बताने की शर्त पर एक विभाग प्रमुख ने बताया कि नियम के अनुसार एक प्रोफेसर के पास तीन पीजी छात्र होने चाहिए, कई स्थानों पर यह औसत चार छात्रों का भी है। लेकिन प्रोफेसरों की कमी की वजह से यूसीएमएस में ऐसा नहीं हो पा रहा है। पिछले पांच साल में यहां से जो वरिष्ठ डॉक्टर रिटायर हुए, उनके स्थान पर कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। इसकी वजह से सारे ही विभाग लगभग आधी क्षमता में चल रहे हैं। इसका खामियाजा मरीजों और छात्रों को भी हो रहा है। कॉलेज में इसकी वजह से न तो एमबीबीएस के छात्रों को ही पूरा समय मिल पाता है और न ही एमडी व एमएस के छात्रों को। वहीं अस्पताल में मरीजों का इलाज भी प्रभावित हो रहा है। इस पर दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट रजिस्टार का कहना है कि इसके लिए दोबारा से स्क्रीनिंग प्रक्रिया शुरू की जा रही है। लेकिन यह प्रक्रिया कब तक खत्म होगी और कब तक नियुक्तियां हो पाएंगी इस बाबत कोई तारीख नहीं दी जा सकती।

– विकास कुमार

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