पूर्वोत्तर में भी मिलेगी चीनी माल को मात…


नई दिल्ली: चीनी माल न खरीदन को लेकर स्वदेशी जागरण मंच अब पूर्वोत्तर भारत में जोरदार अभियान चलाने वाला है। पूर्वोत्तर में असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय और मणिपुर में स्वदेशी जागरण मंच ने काम शुरू कर दिया है। अभी तक मंच द्वारा चलाए गए अभियान के तहत करीब एक करोड़ लोगों ने चीनी माल न खरीदने के लिए संकल्प पत्र भरे हैं। मंच का कहना है कि हमारे कार्यकर्ता हर जगह चीनी माल के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य दिवाली तक पांच करोड़ लोगों से संकल्प पत्र भरवाने का है जिसमें वह शपथ लेंगे कि वह चीन का कोई भी सामान नहीं खरीदेंगे। हमारा उद्देश्य चीन की आर्थिक प्रगति को रोकना है। वह तभी संभव होगा जब भारतीय पूरी तरह चीनी सामान से तौबा कर लेंगे।

स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि भारत का कुल अंतरराष्ट्रीय व्यापार 640 अरब डॉलर का है। वर्ष 2015-16 में भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में 118.5 बिलियन डॉलर का घाटा हुआ था। भारत सबसे ज्यादा आयात पेट्रोलियम का करता है, जो कुल आयात का लगभग 26 प्रतिशत है। गौर करने वाली बात यह है कि पेट्रोलियम उत्पादों में से हम चीन से कुछ नहीं खरीदते। पेट्रोलियम पदार्थ हम रशिया, अफ्रीका, नाइजीरिया आदि से खरीदते हैं। इसके बावजूद चीन से हमारा व्यापारिक घाटा 52.8 बिलियन डॉलर का है। यानी कुल घाटे का 44 प्रतिशत। आंकड़ों के अनुसार बात करें तो पिछले साल हमने चीन के साथ भारत ने कुल 71.6 बिलियन का कुल व्यापार किया। उसमें से चीन से हमने 61.8 बिलियन डॉलर का आयात किया। केवल 9 बिलियन डॉलर का हम चीन को आयात कर रहे हैं।

चीन अपना बेकार माल यहां खपा रहा है और लोग सस्ते में चक्कर में उसे खरीद रहे हैं। चीनी माल से देश में रोजगार के अवसर घट रहे हैं। हमारी फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। पिछले साल स्वदेशी जागरण मंच के अभियान के कारण दिवाली पर चीनी माल की खपत बहुत कम हुई थी। स्वदेशी जागरण मंच लगातार देशभर में चीन के खिलाफ अभियान चला रहा है। मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक अश्विनी महाजन का कहना है कि हमने अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। इस साल हम चीनी माल के खिलाफ अभियान को पूर्वोत्तर में तेज करेंगे। हाल ही में स्वदेशी जागरण मंच ने पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों में काम शुरू किया है। हमारा उद्देश्य इस दिवाली तक पांच करोड़ लोगों से चीनी माल न खरीदने का संकल्प पत्र भरवाने का है। उनका कहना है कि चीन हमेशा से भारत से शत्रुता पूर्ण व्यवहार करता आ रहा है। 1962 में उसने हमारी 37500 वर्ग किलोमीटर भूमि पर कब्जा कर लिया था। अभी वह लद्दाख और अरुणाचल की 90 हजार वर्ग मीटर पर अपना दावा करता रहता है। यदि हमें चीन को रोकना है तो उस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाना जरूरी है।

– आदित्य भारद्वाज