नेबसराय गांव: सदियों पुरानी बड़ी जोहड़ बनी आफत


दक्षिणी दिल्ली: नेबसराय गांव की सदियों पुरानी बड़ी जोहड़ जो कभी गांव के लोगों का एक प्रकार से जीवन होती थी। आज वही आफत समान बन चुका है। जोहड़ के चारों तरफ अवैध अतिक्रमण के चलते बरसाती पानी आना बिल्कुल बंद हो गया। चारों ओर अतिक्रमण के चलते तालाब का रास्ता बंद हो चुका है। अब इसमें पानी की जगह सीवर, इन्द्र एंक्लेव व इग्नु परिसर का गन्दा पानी आने से तालाब आज गांववासियों के लिए आफत समान बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन दशक पूर्व गांव के लोगों के लिए यह तालाब एक प्रकार से लाइफ लाइन जैसा था। जबतक स्वच्छ पानी था इलाके में पीने के पानी की समस्याएं नहीं थी किंतु आज ये तालाब बीमारियों का सबव बन चुका है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीण तालाब के तरफ झांकते तक नहीं हैं। जिला उपायुक्त दक्षिणी कार्यालय से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह तालाब आज काफी जीर्णशीर्ण अवस्था में है। सैकड़ों वर्ष पुराने इस तालाब का आखिर कब तक जीर्णोंद्धार होगा।

कोई बताने को तैयार नहीं है। पुराने तालाब को नये रूप देने की बनाई गई योजनाएं यहां पूरी तरह से धुमिल होती दिखाई पड़ रही है। गांव के सभी पुराने वॉटर बाडी की एक जैसी ही हालात बन चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जलाशय के इर्द-गिर्द जानबूझ कर गांव के रसूक दार व्यक्ति अवैध कब्जा करवाते रहे और अधिकारी देखते रहे। पूरे तालाब में गन्दा पानी भरा होने से ओवर फ्लो होकर सड़कों पर फैल जाता है। जिस कारण गांव के अंदर कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं। यही हालात गांव के नई जोहड़ (फ्रीडम फाइटर कालोनी) की है। एक तरफ सरकार सभी पुरानी जोहड़ों को जीर्णोंद्धार करने का दावा करती है। वहीं अधिकारी है कि वह भूमाफियाओं को संरक्षण देकर जोहड़ों को खत्म करने पर तुले हैं।

– संजीव झा