राजधानी में व्यापारियों पर नई शामत…


नई दिल्ली: लगता है कि दिल्ली के व्यापारियों की साढ़े साती चल रही है। तभी उन पर एक के बाद एक मुसीबतें आ रही हैं। नोटबंदी और जीएसटी में हुए नुकसान से अभी उबर भी नहीं पाए थे कि अब एक नई मुसीबत सामने आकर खड़ी हो गई। अगर इस मुसीबत ने अपने पैर पसारे तो राजधानी से थोक व्यापार समाप्त हो जाएगा। आने वाले 17 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट इस बात का फैसला करेगा कि दिल्ली में आउटर रिंग रोड के अंदर कोई गोदाम नहीं रहेगा। साथ ही चार पहिए से बड़ा कोई भी मालवाहक वाहन भी इस सीमा के भीतर प्रवेश नहीं पा सकेगा।

क्या है मामला…
वर्ष 1999 में दिल्ली के लालकुआं इलाके के कैमिकल बाजार में ब्लास्ट हुआ था। जिसमें 57 लोग मारे गए थे। इस मामले की सुनवाई के दौरान ऐसे थोक बाजारों को दिल्ली से हटाने की जरूरत महसूस की गई। इस बाबत भूरेलाल की अध्यक्षता में इंवायरमेंट पॉल्यूशन कंट्रोल अथोरिटी गठित की गई। इस अथोरिटी ने वर्ष 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया कि थोक बाजारों के गोदाम और ट्रांसपोर्ट को आउटर रिंग रोड़ के बाहर किया जाय। इससे पहले 2004 मे तब के दिल्ली उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश विजेंद्र जैन ने एक आदेश पारित किया था।

जिसके तहत आउटर रिंग रोड के अंदर दिल्ली मे न तो कोई गोदाम रहेगा और न ही किसी भी प्रकार की कोई लोडिंग एवं अनलोडिंग होगी। इसके साथ ही चार पहिए से ऊपर के सभी माल वाहक वाहन 24 घंटे चलने के लिए वर्जित होंगे। यह आदेश रेलवे यार्डों के लिए भी जारी हुआ था। वर्ष 2006 मे दिल्ली नगर निगम, डीडीए एवं दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गोदामों की सीलिंग शुरू कर दिया था। साथ ही ट्रकों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई को रोकने के लिए दिल्ली की दोनों प्रमुख ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। जिसमें उन्हें स्टे मिल गया था। 11 साल बाद इसके अंतिम फैसले के लिए 17 जुलाई की तारीख तय की गई है।

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