किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं : जेटली


नई दिल्ली : सरकार ने आज राज्यसभा में आश्वासन दिया कि किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जायेगी और गौरक्षा के नाम पर पीट पीट कर हत्या दलित उत्पीडऩ या गौ हत्या करने वालों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई होगी। मंत्री के जबाव पर असंतोष व्यक्त करते हुये बहुजन समाज पार्टी के सदस्यों ने सदन से वहिर्गमन किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश भर में अल्पसंख्यकों और दलितों की पीट पीट कर हत्या और उनपर अत्याचार की घटनाओं में कथित वृद्धि से उत्पन्न स्थिति पर अल्पकालिक चर्चा का जबाव देते हुये कहा कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है।

राज्य सरकारों से ऐसी घटनाओं के संबंध में तत्काल पूरी जानकारी मांगी जाती है और हर तरह से सहायता उपलब्ध करायी जाती है। उन्होंने सदस्यों से कहा कि उन्हें अगर ऐसी घटनाओं की कोई जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना राज्य सरकारों को देनी चाहिए और अगर राज्य सरकारें कार्रवाई नहीं करती है तो केन्द्रीय गृह मंत्रालय को बताना चाहिए। उन्होंने हाल ही दिनों में हुयी ऐसी घटनाओं के संबंध में कहा कि गृह मंत्रालय इन घटनाओं पर कड़ी निगाह रख रहा है और प्रत्येक घटना की प्राथमिकी दर्ज की गयी है तथा सभी मामलों में गिरफ्तारियां भी हुयी। लोग जेल में बंद है और उनके विरुद्ध आरोप पत्र भी दाखिल किये गये हैं।

श्री जेटली ने संविधान के नीति निर्देशक सिद्धांतों का उल्लेख करते हुये कहा कि संविधान में गाय, बछड़ा समेत सभी दुधारू पशुओं के संरक्षण और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार को दी है। इसके लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार बनाया गया है। आरंभ में कुछेक राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों ने गौ हत्या पर प्रतिबंध लगा दिया था। सबसे पहले यह कानून कांग्रेस की मध्य प्रदेश सरकार ने बनाया था और इसके बाद एक एक राज्यों ने ऐसे ही कानून बनाये। उस समय देश के अधिकांश राज्यों में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी।

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