ओबीसी उम्मीदवार नॉट सूटेबल


पश्चिमी दिल्ली: डीयू में लंबे समय के बाद शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई थी। साउथ कैंपस में डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल में सेलेक्शन कमेटी ने फस्र्ट इंटरव्यू में ही ओबीसी उम्मीदवारों को नॉट फाइंड सूटेबल कर दिया। इंटरव्यू की यह प्रक्रिया पिछले दिनों असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर विभिन्न श्रेणियों के लिये हुई थी। डीयू एकेडमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि 3 जुलाई को हुई कार्यकारी परिषद (ईसी) की मीटिंग में जिन उम्मीदवारों का चयन हुआ था। उनका लिफाफा खोला गया था। सेलेक्शन कमेटी की मिनट्स से पता चला कि 4 पदों पर हुए इंटरव्यू में सामान्य श्रेणी-2, एससी-1 और ओबीसी के लिए एक पद था लेकिन ओबीसी के पद पर किसी भी उम्मीदवार को सूटेबल नहीं पाया गया। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेशियल स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए 15 से 17 जून तक इंटरव्यू की प्रक्रिया चली थी। दो दिन तक आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ था।

ओबीसी कोटे के तहत 20 से अधिक उम्मीदवारों ने अप्लाई किया था, जिसमें से 15-16 केंडिडेट उपस्थित हुए। ईसी की मीटिंग में अप्रूवल देने के लिए जब चयनित उम्मीदवारों का लिफाफा खोला गया तो उसमें ओबीसी के पद को कमेटी ने नॉट फाउंड सूटेबल किया हुआ था। उन्होंने बताया कि इंटरव्यू में अच्छी परफॉर्मेंस होने के बावजूद किस आधार पर उन्हें नॉट फाउंड सूटेबल किया गया। इनमे से अधिकांश उम्मीदवार एमए, नेट और जेआरएफ के अलावा पीएचडी व लंबे समय से डीयू में पढ़ा रहे हैं, फि र भी उन्हें सूटेबल नहीं माना जाना सोचनीय विषय है। प्रो. सुमन ने बताया कि 9 जुलाई 2015 को अपने दौरे में संसदीय समिति ने कहा था कि जब भी एससी, एसटी, ओबीसी के केंडिडेट का परमानेंट पोस्ट पर इंटरव्यू हो तो उसमें ऑब्जर्वर बिठाना अनिवार्य है। इसके साथ ही जब इंटरव्यू में केंडिडेट उपलब्ध हो तो उसे नॉट फ ाउंड सूटेबल न किया जाए, ऐसा करने पर विभाग उनकी वेकेंसी समाप्त कर देते हैं।

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