देश के 21 हाइवे पर लड़ाकू विमान उतारने की तैयारी


नई दिल्ली: देशभर के विभिन्न राज्यों में स्थित 21 हाइवे पर लड़ाकू विमान उतारे जा सकते हैं। रक्षा मंत्रालय ने सभी हाइवे का बारीकी से निरीक्षण किया और इन हाइवे पर लड़ाकू विमान उतारे जा सकते हैं। इसके लिए परिवहन मंत्रालय ने सहमती दे दी है। कुछ हाइवे को मंजूरी भी मिल गई है। इससे पहले ग्रेटर नोएडा से आगरा तक के यमुना एक्सप्रेस-वे लड़ाकू विमान उतारने की प्रेक्टिस भी हो चुकी है। इन 21 हाइवे में यमुना एक्सप्रेस वे का नाम भी शामिल है। इसके अलावा दिल्ली से मुरादाबाद एक्सप्रेस-वे का भी नाम है। मुरादाबाद एक्सप्रेस वे विमानों को उतारने की मंजूरी भी मिल चुकी है। जानकारी के मुताबिक इन हाइवे को हवाई पट्टी के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें वाहन भी चलेंगे और जरूरत पडऩे पर विमान भी उतारे जाएंगे।

इसमें छत्तीसगढ़, ओडिशा, जम्मू, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, राजस्थान आदि राज्यों में स्थित हाइवे पर विमान उतारने की तैयारी है। मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि देशभर में 21 नेशनल हाइवे पर वायु सेना के विमानों की आपात लैडिंग कराने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। परिवहन मंत्रालय की इस योजना में पूरे देश में स्थित हाइवे को शामिल किया गया है। विमान की लैडिंग व टेकऑफ के लिए नेशनल हाइवे का चयन वायु सेना के अधिकारियों द्वारा किया गया है। वायु सेना ने 21 हाइवे को हवाई पट्टी के लिए चिन्हित किया है। जबकि कुछ हाइवे का अभी मुआयना किया जा रहा है। स्वीकृत नेशनल हाइवे को हवाई पट्टी में बदलने का काम जल्द शुरू किया जाएगा।

सड़क को इस तरह से मजबूती दी जाएगी कि विमान के उतरने पर सड़क यथास्थिति में रहे। जिसके लिए नीचे के हिस्से को कंक्रीट का बनाया जाएगा। हवाई पट्टी घोषित राजमार्गों पर सामान्य दिनों में आम जनता के लिए यातायात बहाल रहेगा, लेकिन जरूरत पडऩे पर उस हिस्से का यातायात पूरी तरह से बंद कर उस मार्ग को बदल दिया जाएगा। इसके लिए वैकल्पिक मार्ग का प्रबंधन भी किया जाएगा। जिससे लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं हो। दरअसल, वायु सेना के विमान को उतारने के लिए सड़क को हवाई पट्टी में बदलने की योजना के पीछे मकसद है प्राकृतिक आपदा में समुचित तरीके से काम हो पाना।

देश में कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है, जब विमान के बिना लोगों की सहायता नहीं की जा सकती, ऐसे में सबसे बड़ा संकट हवाई पट्टी का आता है। इसलिए देश के सभी कोनों के ऐसे नेशनल हाइवे को चिहिंत किया गया है, जहां से कई राज्यों को कवर किया जा सके। ओडिशा के जिन तीन हाइवे को चुना गया है, उससे छत्तीसगढ़ और झारखंड भी जुड़ा हुआ है। युद्ध के लिहाज से भी यह व्यवस्था कारगर रहेगी। यदि कभी इस तरह की नौबत आई तो विमान उतारने और सेना की तैनाती में इससे काफी मदद मिल सकेगी। यह प्रयोग भारत में पहली बार हो रहा है, जबकि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान कई देशों में सड़कों का लड़ाकू विमानों के लिए खूब प्रयोग किया गया था।

– सुरेन्द्र पंडित

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