आजादी की खुशबू पायदान के अंतिम छोर पर व्यक्ति तक पहुंचे : महेश शर्मा


नई दिल्ली : केन्द्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने आज कहा कि आजादी की खुशबू पायदान के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक न पहुंचे तो यह आजादी बेमानी होगी। श्री शर्मा ने भारत छोड़ो आन्दोलन और आजाद हिन्द फौज की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। नौ अगस्त से एक सितम्बर तक चलने वाली प्रदर्शनी में 1942 के आन्दोलन की झांकी चित्रों, दुर्लभ दस्तावेजों और विडियो के जरीये रोचक ढंग से पेश की गयी है।

डॉ शर्मा ने कहा, यूँ तो आजाद की लडाई 1857 में ही शुरू हो गयी थी पर इसका उत्कर्ष 1942 में देखने को मिला जब राष्ट्र पिता महात्मा गांधी के नेतृत्व और सुभाष चन्द, बोस की आजाद हिन्द फौज के जरिये हमने पांच साल के भीतर आजादी हासिल की। जिस तरह 1942 से 47 के बीच पांच साल में हमें आजादी मिली उसी तरह अगस्त क्रांति के 75 साल 2017 से 2022 में आजादी के 75 वें साल में हमें नए भारत का निर्माण करना है और प्रधानमंत्री ने लोकसभा में आज जो संकल्प व्यक्त किया है उसे पूरा करना है।

नए भारत के निर्माण के लिए गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद और गंदगी से भी आत्रादी दिलानी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज की नयी पीढ़ी को यह महसूस करने की बेहद जरुरत है कि हमें कितनी कुर्बानियों से यह आजादी मिली। इस पीढ़ी को वीरों की कुबानी और त्याग के साथ साथ उस दौर का इतिहास भी जन ने की आवश्यकता है प्रदर्शनी में भारत छोडो आन्दोलन के मौके पर गांधी जी के सन्देश के अलावा कांग्रेस के उस प्रस्ताव की प्रति भी पेश की गयी है जिसमें 1942 का आन्दोलन छेडऩे का निर्णय लिया गया था।

गांधी जी और अन्य स्वतंत्रता सेनानी किस तरह आगा खान महल और अहमदनगर किले में नत्ररबंद किये गए थे उनकी तस्वीर भी पेश की गयी और तमाम प्रमुख समाजवादियों के चित्र भी पेश किये गए हैं। इसके अलावा प्रमुख शहीदों की भी सूची दी गयी है। इस अवसर पर राष्ट्रीय अभिलेखागार के महानिदेशक राघवेन्द्र ङ्क्षसह तथा नेहरु पुस्तकाल एवं संग्राहलय के निदेशक भी थे।