अवैध निर्माण के चलते साउथ जोन में तीन अधिकारी निलंबित


दक्षिणी दिल्ली: एसडीएमसी में मंगलवार को डीसी सेंट्रल जोन और डीसी साउथ जोन का तबादला कर दिया गया। इससे ठीक पहले बीते सप्ताह में अवैध निर्माण के चलते बिल्डिंग विभाग के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर दिया गया। चर्चा है कि डीसी के तबादले की कार्रवाई भी अवैध निर्माण के चलते की गई है। नगर निगम में अवैध निर्माण का मुद्दा शुरू से ही गर्माया रहता है। इसी कड़ी में ग्रीन पार्क स्थित साउथ जोन कार्यालय के बिल्डिंग विभाग में कार्यरत अधिशासी अभियंता-दो (एक्स.ईएन) अशोक कुमार, सहायक अभियंता (एई) एके जैन और कनिष्ठ अभियंता (बीएम शर्मा) को गत सप्ताह अवैध निर्माण के चलते निलंबित कर दिया गया। चर्चा है कि साउथ जोन में सैदुल्लाजाब, छतरपुर, खिड़की एक्सटेंशन और पंचशील विहार इलाके में अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर एसडीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त पूरे मामले को देख रहे थे।

सूत्रों की मानें तो उसी की रिपोर्ट तैयार करने के दौरान तीनों कर्मचारियों को निलंबित किया गया है। यही नहीं एक्स. ईएन अशोक कुमार को पहले जोन से हटाया गया, लेकिन उसके बाद निलंबित कर दिया गया। इसी क्रम में मंगलवार को सेंट्रल जोन के डीसी विश्वेन्द्र और साउथ जोन के डीसी एसके सिंह का तबादला कर दिया गया। दोनों अधिकारियों के जाने आपस में बदल दिए गए। अब विश्वेन्द्र साउथ तो एसके सिंह सेंट्रल जोन के डीसी बनाए गए हैं। विश्वेन्द्र कुछ समय पूर्व ही उपराज्यपाल निवास से सेंट्रल जोन आए थे। यहां कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने सफाई के मुद्दे पर कर्मचारियों को सख्ती से लिया जिसके चलते कुछ पर कार्रवाई भी की गई। उन्हें काफी तेज तर्रार अधिकारी माना जाता है। ऐसे में अब वह साउथ जोन का जिम्मा संभालेंगे।

साउथ जोन के सूत्रों की मानें तो अभी भी साउथ जोन के बिल्डिंग-एक इलाके यानी पंचशील विहार और खिड़की एक्सटेंशन में अवैध निर्माण का बोलबाला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किसकी शह पर इस इलाके में तैनात अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई या फिर किस अधिकारी की शह पर यहां तैनात कर्मचारियों को बचाया जा रहा है। इनके अलावा छतरपुर और आसपास की कॉलोनियों में धड़ल्ले से नियमों को ताक पर रखकर बिल्डर्स फ्लैट बनाए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यदि एक आम इंसान मकान बनाता है तो उसे एमसीडी और पुलिस वाले कानून का पाठ पढ़ाकर उन्हें डराते हैं और मांग पूरी न करने पर कार्रवाई तक करवा देते हैं। इसके लिए हर वार्ड में कुछ लोग ऐसे सक्रिय हैं, जो कि अवैध निर्माण की शिकायत करते हैं और बाद में अधिकारियों के साथ बैठकर उनका समझौता करवाते हैं। सूत्रों की मानें तो अभी साउथ और सेंट्रल जोन के बिल्डिंग विभाग में अर्से से कुछ दागी अधिकारी जमे हुए हैं जिनके विरुद्ध विभिन्न एजेंसियां जांच भी कर रही हैं। फिर भी कुछ लोगों की अनुकंपा के चलते उन पर कार्रवाई नहीं की जाती है।

– राहुल शर्मा/सज्जन चौधरी

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