‘चीन पर जल्द लगाए जाएं आर्थिक प्रतिबंध’


नई दिल्ली: चीन के साथ भारत-भूटान सीमा पर हो रही तनातनी, चीन के सरकारी मीडिया द्वारा रोजाना दिए जा रहे भड़काऊ बयानों के मद्देनजर स्वदेशी जागरण मंच ने चीन को शत्रु देशों की सूची में डालने की बात कही है। साथ ही चीन के साथ पूरी तरह से व्यापार पर प्रतिबंध लगाने को भी कहा है। सेवा भारती में भारत चीन के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर हुई एक संगोष्ठी में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक अश्विनी महाजन ने चीन की नीतियों और भारत के साथ उसके संबंधों पर अपनी बात रखी। हाल ही में उन्होंने इस संबंध में संघ के मुखपत्र पांचजन्य में भी लिखा है। पांचजन्य ने ‘बोल गलत तोल गलत’ नाम से इसे अपनी कवर स्टोरी बनाया है। इस लेख में चीन की भारत को लेकर विदेश नीति और आर्थिक नीति पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही भारत में अपना माल खपाने के लिए मूल्य से भी कम लागत पर अपना माल डंप करने की नीतियों की भी बखिया उधेड़ी है।

अश्विनी महाजन का कहना है कि ऐसा नहीं होता कि कोई देश हमारे साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार करे और हम उस देश से 42 हजार करोड़ रुपए का माल आयात करते रहें। इतना ही नहीं बल्कि उस देश की कंपनियों को अपने यहां रेल, सड़क, टेलीकॉम समेत तमाम कंपनियों को निर्माण के ठेके भी देते रहें। उन्होंने चीन का दौरा करने वाले नीति-निर्माताओं पर भी सवाल उठाए। महाजन ने कहा कि नीति निर्माता चीन का दौरा करते हुए पलक-पावंड़े बिछाए बैठे हैं। जबकि संवेदनशील और सामरिक महत्व के ठिकानों पर चीन की सरकारी कंपनियां काबिज हैं। कई राज्यों के मुख्यमंत्री तो यह भी कहते पाए गए हैं कि चीन से आयात तो नहीं लेकिन निवेश का स्वागत है। चीन द्वारा मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी घोषित करने को लेकर और भारत की न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) में सदस्यता पर अड़ंगा लगाना, उसकी भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण सोच को दर्शाती है। पिछले साल दीपावली के अवसर पर चीनी माल के बहिष्कार के चलते भारतीय बाजारों में चीनी सामान की मांग 50 प्रतिशत तक कम हो गई थी। इस भी चीन के माल का बहिष्कार किया जाना चाहिए।

– आदित्य भारद्वाज

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