विश्वशांति के लिए अणुव्रत का प्रयास अद्वितीय: अर्जुनराम मेघवाल


नई दिल्ली: विश्व शांति के लिए अणुव्रत का प्रयास काफी अहम और अद्वितीय है। जैन मुनियों ने विश्व शांति के लिए लगातार प्रयासरत रहते हैं इसे कोई भुला नहीं सकता है। किसी भी देश को सही रास्ते पर चलने के लिए मुनियों के मार्गदर्शन की जरूरत होती है जिसमें अणुव्रत का योगदान को भला कौन नहीं जानता। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत की नींव रखीं जो आज लगातार युवाओं को मार्गदर्शन दे रहा है। उक्त उद्गार केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने अणुव्रत महासमिति द्वारा एनडीएमसी कंवेंशन सेंटर में आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय अणुव्रत साहित्यकार सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा जिस प्रकार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास से विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है वह काफी अहम है।

कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में केन्द्रीय युवा कार्यक्रम और खेल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विजय गोयल मौजूद थे। मंत्री विजय गोयल ने कहा कि अणुव्रत जिन सिद्धांतों पर कार्य कर रहा है, मोदी सरकार उन्हीं के अनुरूप अपनी योजनाओं को अमलीजामा पहना रही है। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि मोदी सरकार के स्वच्छ भारत अभियान, भ्रष्टाचार मुक्त भारत जैसी कई योजनाओं पर अणुव्रत सालों से काम कर रहा है। भारत सरकार आज जो भी योजनाओं को लेकर आ रही है वह सभी सामाजिक योजनाएं हैं जिनसे समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ मिलेगा। खेलमंत्री ने अपने ड्रीम मिशन प्रोजेक्ट स्लम युवा दौड़ को लेकर भी अपना सम्बोधन रखा। उन्होंने बताया कि आगामी समय में इस योजना को देशभर में लागू किया जाएगा। ताकि इस योजना की मदद से खेल मंत्रालय आर्थिक तौर पर कमजोर युवाओं को खेल के माध्यम से बेहतरीन प्लेटफॉर्म मिल सके। गोयल ने कहा कि देश के युवा सपने देखें और इनको पूरा करने के लिए सदैव प्रयास करें। उन्होंने साहित्य सम्मेलन को लेकर अणुव्रत महासमिति की भी सराहना की।

कार्यक्रम में संवाद सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की चेयरपर्सन व पंजाब केसरी दिल्ली की डायरेक्टर श्रीमती किरण चोपड़ा ने की। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि साहित्यकार और कवि वहीं हो सकता है जो संवेदनाओं से परिपूर्ण हो। कवि व साहित्यकार अपनी कविताओं और साहित्य के माध्यम से किसी भी व्यक्ति में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत कर सकते हैं, तभी अक्सर कहा जाता है कि कवि है तो जोश है, कविता है तो होश है। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र के साहित्य से ही उसकी सभ्यता व संस्कृति की पहचान होती है। बिना साहित्य के कोई भी राष्ट्र निर्बल होता है। भारतीय संस्कृति में भी साहित्यकारों का महत्वपूर्ण योगदान है। आज सामज में ऐसे साहित्य सम्मेलनों के होने की आवश्यकता है ताकि हम कवियों व साहित्यकारों को सदैव सम्मानित कर सकें। श्रीमती चोपड़ा ने इस दौरान सभी को वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की गतिविधियों से भी अवगत करवाया।

 

 

कार्यक्रम में पद्मश्री वरिष्ठ हास्य व्यंग्य रचनाकार सुरेन्द्र शर्मा भी मौजूद थे। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि आज हम भले ही एकता की बात करते हैं लेकिन हम एक नहीं हैं। जब हम दूसरे के दुख: में अपनी खुशी ढुंढ़ते हैं तो हम कैसे अनेकता में एकता की बात कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री तुलसी ने सदैव ऐसे संदेश दिए जो सदैव सभी धर्मों, जाति, समुदाय के लोगों के लिए थे। आचार्य जी सदैव एकता की बात करते थे लेकिन मैं मानता हूं कि आज हमने आचार्य जी को भी बांट दिया है। हमने उन्हें सिर्फ जैन समाज का गुरु बना दिया है लेकिन आचार्य जी मानव धर्म के गुरु थे। सम्मेलन में अन्तर्राष्ट्रीय कवि गजेन्द्र सोलंकी भी मौजूद रहे। कवि सोलंकी ने अपनी कविता बचा लो अपना हिंदुस्तान के माध्यम से भारत के विकास से ड्रेगन को हो रही बौखलाहट की बात करते हुए कहा कि यदि हमें ड्रेगन को मात देनी है तो उसकी अर्थव्यवस्था पर चोट पहुंचानी होगी। उन्होंने अपने सम्बोधन में प्रकृति का अस्तित्व को भी संकट में बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रकृतिवादी होना चाहिए क्योंकि हमें आज जो भी मिला है प्रकृति से ही मिला है लेकिन हम अपने फायदे के लिए प्रकृति के अस्तित्व को ही संकट में डाल रहे हैं। कार्यक्रम को पांच प्रमुख सूत्रों में बांटा गया।

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमेन बलदेव भाई शर्मा, भारतीय विदेश नीति परिषद् के अध्यक्ष वेद प्रताप वैदिक सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। वहीं वैचारिक सत्र प्रथम व द्वितीय में हिन्दी विभाग की प्रो. कुमुद शर्मा, पंजाब हिन्दी विभाग विवि. के अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के समापन व सम्मान सत्र में अणुव्रत महासमिति की तरफ से साहित्य सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहराने वाले डा. रामशरण गौड़, देवेन्द्र आर्य, पुखराज सेठिया, राजेश जैन, बीएस भाटी, दिनेश शर्मा, महेशचन्द्र शर्मा, संगीता सिन्हा सहित अन्य को सम्मानित किया गया। अणुव्रत महासमिति के अध्यक्ष श्री सुरेंद्र जैन एडवोकेट ने कहा कि साहित्य समय काल को प्रदर्शित करता है। साहित्य से किसी काल के जनजीवन और सामाजिक दशा-दिशा को जाना जा सकता है। डॉ. कुसुम लुणिया द्वारा लिखी पुस्तक ‘सिक्रेट्स ऑफ दे हेल्थ’ व ‘अणुव्रत एक संकल्प’ डेकोमेंट्री को लोकार्पण भी किया गया।

– भारत कपूर

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